बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सामान्य किसान के सिर पर 72 लाख रुपये से अधिक की जीएसटी वसूली का बोझ आ पड़ा है। तमिलनाडु के जीएसटी विभाग से मिले इस नोटिस ने बलिया के सिउरा गोपालपुर निवासी 33 वर्षीय बलबीर सिंह की नींद उड़ा दी है। बलबीर का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में न तो कभी तमिलनाडु की धरती पर कदम रखा है और न ही वहां कोई व्यापार किया है, फिर भी उनके नाम पर यह भारी-भरकम टैक्स नोटिस जारी कर दिया गया।
ईमेल ने उड़ाई किसान की नींद
नोटिस की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह केंद्रीय जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के सहायक आयुक्त कार्यालय (कोविलपट्टी मंडल, तमिलनाडु) द्वारा भेजा गया है। 15 जुलाई को मिले इस ईमेल में दावा किया गया कि बलबीर ‘मेसर्स महेंद्र एजेंसी’ नामक फर्म के मालिक हैं। नोटिस में वर्ष 2019 से 2020 के बीच कर बकाया होने का हवाला देते हुए जुर्माना, ब्याज और विलंब शुल्क सहित कुल 72.76 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया गया है।
छात्रवृत्ति के लिए खुला था बैंक खाता
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू बलबीर का बैंक खाता है। सीजीएसटी अधिनियम के तहत जारी इस नोटिस में गाजीपुर के एक बैंक खाते का उल्लेख है। जब किसान ने अपनी बैंक पासबुक पेश की, तो हकीकत कुछ और ही निकली। बलबीर ने बताया कि यह खाता 2017 में बीटीसी (BTC) प्रशिक्षण के दौरान केवल छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए खुलवाया गया था। बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, इस खाते में कोई भी व्यावसायिक लेन-देन नहीं हुआ है और वर्तमान में बैलेंस ‘माइनस’ में चल रहा है।
क्या पैन कार्ड का हुआ है दुरुपयोग?
बलबीर सिंह अपने परिवार का पेट पालने के लिए अपने भाई के साथ खेती करते हैं। उनका दावा है कि किसी अज्ञात जालसाज ने उनके पैन कार्ड और बैंक खाते की जानकारी चुराकर अवैध रूप से फर्म का पंजीकरण कराया है। यह एक स्पष्ट साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) का मामला प्रतीत होता है, जहां बलबीर की पहचान का उपयोग कर करोड़ों का कारोबार किया गया और कर चोरी की गई।
पुलिस और साइबर सेल की जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए बलबीर सिंह ने भीमपुरा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। थाना प्रभारी रंजीत विश्वकर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत मिल गई है और इस जटिल मामले की तह तक जाने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर बलबीर के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके यह फर्म किसने और कहां से संचालित की। यह मामला न केवल बलबीर के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी एक चेतावनी है कि अपने दस्तावेजों और पैन कार्ड की सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क रहने की आवश्यकता है।





















































