बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया। यहां एक नाबालिग भांजी के साथ दुष्कर्म करने वाले उसके ही सगे मामा को विशेष अदालत ने कठोर सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) नीरज कुमार गर्ग ने आरोपी को दोषी पाते हुए 20 साल के सश्रम कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई है। इस फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून किसी भी सूरत में बख्शेगा नहीं।
क्या था पूरा मामला?
घटना का खुलासा तब हुआ जब अक्टूबर 2024 में 16 वर्षीय पीड़िता के पिता ने कुंवरगांव थाने में अपनी बेटी के अचानक लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की और कुछ ही समय में पीड़िता को दिल्ली से बरामद कर लिया। पीड़िता के बयानों ने परिवार और समाज को झकझोर कर रख दिया। किशोरी ने पुलिस और अदालत के सामने खुलासा किया कि उसका मामा आकाश उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ दिल्ली ले गया था।
दिल्ली में कमरा, मंदिर में ‘शादी’ का दिखावा
जांच में सामने आया कि आरोपी आकाश पीड़िता को दिल्ली ले गया, जहां उसने एक कमरा किराए पर लिया। इतना ही नहीं, अपनी करतूतों को जायज ठहराने के लिए आरोपी ने दीपावली के दिन एक मंदिर में पीड़िता से विवाह करने का ढोंग भी रचा। इस घिनौने कृत्य के दौरान नाबालिग पीड़िता गर्भवती भी हो गई, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई। पुलिस द्वारा जुटाए गए ठोस साक्ष्यों और पीड़िता के बयानों ने अदालत में आरोपी के अपराध को साबित कर दिया।
अदालत का कड़ा रुख और जुर्माना
विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र वर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत विशेष न्यायाधीश नीरज कुमार गर्ग ने सुनवाई की। साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए न्यायालय ने आकाश को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा, उस पर 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। न्यायाधीश ने यह भी सुनिश्चित किया कि जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाए, ताकि उसे आर्थिक संबल मिल सके।
अपराध की दुनिया में खौफ का संदेश
बदायूं की इस विशेष अदालत का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो रिश्तों की आड़ में नाबालिगों का शोषण करते हैं। 20 साल की कैद और जुर्माने की यह सजा पीड़ित बच्ची को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का मानना है कि पॉक्सो एक्ट के तहत इस प्रकार के त्वरित और कठोर निर्णय भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में सहायक सिद्ध होंगे।





















































