उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाले एक कुत्सित मामले में न्याय की एक बड़ी और तेज मिसाल पेश की गई है। जिले की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने रिश्तों के सभी पवित्र बंधनों को तार-तार करते हुए अपनी ही सगी डेढ़ साल की चचेरी बहन के साथ घिनौनी करतूत को अंजाम देने वाले कलयुगी चचेरे भाई को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) मनोज कुमार सिद्धू ने महज 21 दिनों की रिकॉर्ड त्वरित सुनवाई के बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दरिंदे को उम्रकैद यानी आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। अदालत के इस त्वरित न्याय ने पूरे इलाके में एक कड़ा संदेश दिया है।
बिस्कुट का लालच देकर मासूम को ले गया था हवान
यह खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना इसी साल 3 मार्च 2026 को मुजफ्फरनगर जिले के खतौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहिद्दीनपुर गांव में प्रकाश में आई थी। शासकीय अधिवक्ता (पॉक्सो) प्रदीप बालियान ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 30 वर्षीय आरोपी टिंकू उर्फ पिंकू ने अपनी ही पारिवारिक मर्यादा और रिश्तों का गला घोट दिया। वह महज 18 महीने की अबोध चचेरी बहन को बहला-फुसलाकर और उसे खाने के लिए बिस्कुट दिलाने का लालच देकर एक सुनसान जगह पर ले गया था। उस मासूम को क्या पता था कि जिस भाई पर भरोसा करके वह जा रही है, वही उसकी जिंदगी और अस्मत को बेरहमी से रौंद देगा। कुछ देर बाद जब बच्ची गंभीर और लहूलुहान हालत में परिवार के लोगों को मिली, तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई और कोहराम मच गया।
त्वरित जांच और पुलिस की मुस्तैदी से मजबूत हुई कानूनी शिकंजा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की दुष्कर्म से जुड़ी गंभीर धाराओं और बाल यौन अपराध संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया और तुरंत आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया। पुलिस ने इस मामले में बिना किसी अनावश्यक देरी के अपनी तफ्तीश पूरी की और साक्ष्यों का संकलन कर अदालत में मजबूत आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया, ताकि अपराधी को कानून के कटघरे में सख्त सजा दिलाई जा सके।
रिकॉर्ड 21 दिन में आया फैसला, अदालत ने लगाया दो लाख का जुर्माना
इस जघन्य प्रकरण की संवेदनशीलता को समझते हुए विशेष पॉक्सो अदालत ने मुकदमे की सुनवाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। शासकीय अधिवक्ता प्रदीप बालियान के अनुसार, इस मामले में गत 3 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए थे और उसके बाद से लगातार सुनवाई की प्रक्रिया चली। अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी टिंकू उर्फ पिंकू को दोषी पाया और शुक्रवार को अपना अंतिम ऐतिहासिक फैसला सुना दिया।
विशेष न्यायाधीश ने दोषी को ताउम्र यानी शेष प्राकृतिक जीवन के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने उस पर दो लाख रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड भी अधिरोपित किया है। न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जुर्माने के रूप में वसूली जाने वाली संपूर्ण राशि पीड़िता को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी, ताकि उसे कुछ आर्थिक संबल मिल सके। समाज को झकझोर देने वाले इस मामले में अदालत द्वारा इतनी तेजी से सजा सुनाया जाना न्याय प्रणाली की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।





















































