राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर देश के युवाओं और छात्र-छात्राओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। नीट-यूजी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं तथा उसके कारण आहत होकर परीक्षार्थियों द्वारा उठाए जा रहे चरम कदमों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस गंभीर विषय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चिंता जताई है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे सियासी टकराव के शोर में शिक्षा प्रणाली के बुनियादी सुधारों का मुख्य उद्देश्य पीछे छूट सकता है।
राजनीतिक छींटाकशी के बीच दब रहा छात्रों का दर्द
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने तीखे तेवर जाहिर करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि जंतर-मंतर पर युवा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे देश के तमाम वर्गों की व्यापक सहानुभूति मिल रही है। हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की जिद और उसे लेकर सत्ताधारी दल तथा विपक्षी पार्टियों के बीच मची सियासी खींचतान ने इस गंभीर विषय को पूरी तरह से राजनीतिक अखाड़ा बना दिया है। मायावती का मानना है कि इस उठापटक के कारण देश की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए जिन बड़े एवं व्यापक सुधारों की आवश्यकता है, वह मुद्दा कहीं ओझल होता जा रहा है।
संसद से सड़क तक बढ़ रहा टकराव और हिंसक होने का अंदेशा
संसद के मौजूदा मानसून सत्र का जिक्र करते हुए मायावती ने अफसोस जताया कि दोनों पक्षों के बीच जारी तनाव के कारण सदन की कार्यवाही एक दिन भी सुचारू रूप से नहीं चल पाई है। संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को अपने पाले में भुनाने की होड़ मची हुई है, जिसके चलते टकराव का यह माहौल अब देश के विभिन्न राज्यों में भी फैलता नजर आ रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि यदि यह स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो यह और अधिक आक्रामक रूप ले सकती है। इसी के मद्देनजर उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पूरी तरह से सतर्क और सजग रहने की सख्त हिदायत दी है।
पुलिसिया कार्रवाई और सरकार की निवारक नीतियों पर सवाल
आंदोलनकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक और पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे प्रकरण को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मायावती ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम अमूमन भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता के कारण पेपर लीक होने के बाद की दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नजर आते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि असली चुनौती प्रश्नपत्र लीक होने के बाद अपराधियों को सजा देने भर की नहीं, बल्कि ऐसी पुख्ता व्यवस्था बनाने की है जिससे भविष्य में इस तरह के जघन्य अपराधों को पूरी तरह से रोका जा सके। निवारक उपायों की कमी के कारण ही आम जनता और युवाओं के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
युवाओं से संयम बरतने की अपील, मिशन के प्रति डटे रहने का आह्वान
अपने संदेश के अंत में बसपा सुप्रीमो ने देश के हताश और निराश युवाओं के साथ-साथ अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से विचलित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके विपरीत, सभी को अपने मूल मिशन के प्रति पूरी निष्ठा, लगन और तन-मन-धन से डटे रहना चाहिए, ताकि देश में न्यायसंगत और पारदर्शी व्यवस्था की स्थापना के लिए संघर्ष जारी रखा जा सके।





















































