उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक ग्रामीण इलाके में धर्मांतरण के काले कारोबार का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। स्थानीय पुलिस ने एक सुनियोजित अभियान के तहत अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट का संचालन कर रहे मुख्य मास्टरमाइंड समेत सात शातिर आरोपियों को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह गरीब और भोले-भाले ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों के इलाज, आर्थिक सहायता और अन्य प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराने के अवैध कृत्य में लंबे समय से संलिप्त था। पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से इलाके में चल रहे इस बड़े नेटवर्क की कलई खुलकर सामने आ गई है।
बीमारी के इलाज और पैसों का झांसा देकर फंसाते थे जाल में
पुलिस से प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह संगठित गिरोह खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपना निशाना बनाता था। आरोपी ग्रामीणों को यह विश्वास दिलाते थे कि ईसाई धर्म अपनाने से उनकी बीमारियां ठीक हो जाएंगी और उन्हें आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए पर्याप्त मदद मिलेगी। इस तरह के प्रलोभन और अनुचित दबाव के जरिए वे सीधे-साधे लोगों को अपनी आस्था बदलने के लिए मजबूर कर रहे थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में इस पूरे सिंडिकेट का कथित सरगना 58 वर्षीय डेनियल भी शामिल है। इसके अलावा पुलिस ने सुबाला (51), चंद्रभान (50), आरती (40), सीमा (35), शीला (39) और अजय रावत (46) को भी गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी राजधानी लखनऊ के ही अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
एक ग्रामीण की हिम्मत से खुला राज, दर्ज हुई एफआईआर
इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ जब क्षेत्र के एक जागरूक ग्रामीण ने पुलिस थाने पहुंचकर इसके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उक्त आरोपी उसे और अन्य स्थानीय ग्रामीणों को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे और धर्म परिवर्तन के लिए भारी दबाव बना रहे थे।
एक अन्य पीड़ित ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उसे घुटने के गंभीर दर्द के इलाज के बहाने बहला-फुसलाकर एक चर्च ले जाया गया था। वहां ले जाने के बाद उस पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला जाने लगा। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया और उनकी बात मानने से इनकार कर दिया, तो वहां जमकर विवाद और हंगामा हुआ, जिसके बाद पुलिस तक यह मामला पहुंचा।
मास्टरमाइंड डेनियल के चौंकाने वाले खुलासे और बरामदगी
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक बोलेरो वाहन, एक प्रमुख धार्मिक ग्रंथ, धर्मांतरण से जुड़ी प्रचार पुस्तिकाएं, विवाह से संबंधित दस्तावेज और बैंक लेन-देन से जुड़े विवरणों की फोटोकॉपी जैसी कई संदिग्ध सामग्रियां बरामद की हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पुलिस ने सभी सातों आरोपियों को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
पुलिस की लंबी पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी डेनियल ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उसका मूल नाम बचपन में बाला सुब्रमण्यम था और तमिलनाडु के कन्याकुमारी की रहने वाली सुबाला से विवाह करने से पहले उसने ईसाई धर्म स्वीकार किया था। डेनियल ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि वह और उसकी पत्नी वर्ष 1998 में कन्याकुमारी स्थित एक चर्च के निर्देश पर ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए लखनऊ आए थे।
आरोपी के मुताबिक, उसे वाराणसी क्षेत्र के लिए पादरी के रूप में नियुक्त किया गया था और संबंधित चर्च द्वारा उसे यह निर्देश दिया गया था कि वह इलाज, वित्तीय मदद और अन्य प्रलोभनों के बल पर लोगों का धर्मांतरण कराए। इसके लिए चर्च की ओर से उसे बाकायदा सालाना लक्ष्य और आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जाती थी। पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार किन-किन अन्य लोगों और संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।





















































