गाजीपुर में हुए एक बड़े भर्ती घोटाले की जांच में बड़ी लापरवाही और संदिग्ध मिलीभगत का मामला सामने आया है। पुलिस महकमे के भीतर चल रहे इस खेल का पर्दाफाश करते हुए वाराणसी रेंज के डीआईजी वैभव कृष्ण ने गाजीपुर कोतवाली में तैनात दो उप निरीक्षकों, रोहित कुमार और जितेंद्र कुमार उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करने वाली कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच को जानबूझकर कमजोर किया और एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की।
क्या है पूरा भर्ती घोटाला और 7 कंपनियों का खेल?
यह पूरा प्रकरण 25 फरवरी 2025 को तब शुरू हुआ जब गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी ने स्थानीय कोतवाली में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, अनुदेशकों की भर्ती के लिए निकाली गई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में कुल 176 कंपनियों ने आवेदन किया था। इसमें से 7 कंपनियों पर गंभीर आरोप लगे कि उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को हथियाने के लिए जाली और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। इतना ही नहीं, इनमें से कई कंपनियों ने बैंक से संबंधित फर्जी प्रमाण-पत्र भी संलग्न किए थे।
डीआईजी की समीक्षा में खुली लापरवाही की परतें
जांच की कमान जब डीआईजी वैभव कृष्ण ने अपने हाथों में ली, तो सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। डीआईजी ने पाया कि बिना किसी ठोस आधार या सत्यापन के, उन सातों संदिग्ध कंपनियों को जांच के दायरे से बाहर निकाल दिया गया था। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि लखनऊ की एक चुनिंदा कंपनी को बचाने के लिए सुनियोजित तरीके से साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया।
समीक्षा के दौरान डीआईजी ने पाया कि प्रथम दृष्टया गंभीर अपराध और जालसाजी के साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद, जांच अधिकारियों ने जल्दबाजी में ‘अंतिम रिपोर्ट’ (Final Report) लगाने की कोशिश की। यह स्पष्ट था कि पूरी जांच को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा था ताकि दोषियों को बचाया जा सके।
कर्तव्य में लापरवाही और विभागीय जांच के आदेश
डीआईजी वैभव कृष्ण ने इस गंभीर अनुशासनहीनता और आपराधिक लापरवाही का संज्ञान लेते हुए उप निरीक्षक रोहित कुमार और जितेंद्र कुमार उपाध्याय को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। निलंबन आदेश के साथ ही डीआईजी ने गाजीपुर के पुलिस उपाधीक्षक (City) को पूरे घटनाक्रम की गहन जांच करने और 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों का कहना है कि निलंबित दरोगाओं के खिलाफ अब विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच न केवल उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है, बल्कि यह भी संकेत दे रही है कि इस भर्ती घोटाले की जड़ें काफी गहरी हो सकती हैं। पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





















































