रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे खूनी संघर्ष की आंच अब उत्तर प्रदेश के एक हंसते-खेते परिवार तक पहुंच गई है, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया है। यूक्रेन के अशांत ओडेसा बंदरगाह के निकट हुए एक भीषण रूसी मिसाइल हमले में मालवाहक जहाज पर डेक कैडेट के रूप में तैनात देवरिया जिले के 22 वर्षीय युवा नाविक अभिषेक निषाद की दर्दनाक मौत हो गई है। इस हृदयविदारक घटना की खबर जैसे ही सोमवार की शाम उनके पैतृक गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया और मातम पसर गया। शोकाकुल परिजनों ने अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है कि उनके लाडले के पार्थिव शरीर को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जाए।
मुंबई की शिपिंग कंपनी के जरिए गए थे विदेश, ‘गोल्डन लियो’ जहाज पर था तैनात
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, देवरिया जिले के गौरीबाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले करमेल गांव के रहने वाले कौशल निषाद के 22 वर्षीय बेटे अभिषेक निषाद अपने उज्ज्वल भविष्य की तलाश में पिछले महीने की 10 जून को ही मुंबई की ‘ओशन ग्रेस शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से नौकरी पर विदेश गए थे। उन्हें ‘गोल्डन लियो’ नामक मालवाहक जहाज पर डेक कैडेट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति को संवारने की उम्मीद में गया यह युवा नाविक क्या जानता था कि युद्ध की विभीषिका उसका इंतजार कर रही है।
काला सागर में मिसाइल हमले का शिकार हुआ मालवाहक जहाज
शोक में डूबे पिता कौशल निषाद ने मीडिया को घटना की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि उनका बेटा जिस मालवाहक जहाज पर सवार था, वह यूक्रेन से विभिन्न प्रकार का सामान लादकर सीरिया की ओर रवाना हुआ था। गत 19 जुलाई की शाम को जब यह जहाज यूक्रेन के ओडेसा तट के पास ब्लैक सी (काला सागर) के जलक्षेत्र से गुजर रहा था, तभी रूसी सेना ने उस पर ताबड़तोड़ तीन मिसाइलें दाग दीं। इस विनाशकारी हमले के वक्त जहाज पर कुल 18 लोग सवार थे। हमले की इस चपेट में आने के बाद से अभिषेक समेत कई अन्य नाविक लापता हो गए थे, जिसके बाद अनहोनी की आशंका सच साबित हुई।
मां से बातचीत के दौरान ही गूंज उठा सायरन, वह आखिरी संवाद बना अंतिम विदाई
इस दुर्घटना से ठीक पहले का वाकया बताते हुए पिता की आंखें नम हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन यानी 19 जुलाई की सुबह और शाम को अभिषेक ने अपनी मां अनीता से मोबाइल फोन पर लंबी बातचीत की थी। शाम को करीब 7 बजे जब मां और बेटे के बीच फोन पर संवाद चल रहा था, तभी अचानक पृष्ठभूमि में यूक्रेन में हवाई हमले की चेतावनी देने वाला सायरन जोर-जोर से बजने लगा।
मां से अपनी आखिरी बातचीत में अभिषेक ने बेहद घबराहट और हड़बड़ी में कहा था कि युद्ध का सायरन बज चुका है और अब उन्हें अपनी जान बचाने के लिए तुरंत बंकर के अंदर भागना होगा, इसलिए वे फोन काट रहे हैं और बाद में बात करेंगे। उस नादान बेटे को क्या पता था कि वह अपनी मां से आखिरी बार बात कर रहा है और इसके बाद उसकी आवाज कभी नहीं सुनाई देगी। इसके बाद से फोन पर संपर्क टूट गया और सोमवार की शाम मुंबई में स्थित शिपिंग कंपनी के एजेंट ने फोन पर परिवार को इस मनहूस हादसे की आधिकारिक जानकारी दी।
सांसद और केंद्र सरकार से लगाई शव व मुआवजे की गुहार
इस असामयिक और गहरे आघात से टूटे हुए अभिषेक के पिता ने बांसगांव क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान से व्यक्तिगत रूप से इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करने का जोरदार अनुरोध किया है। परिवार ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि विदेश मंत्रालय और यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास के जरिए तुरंत कूटनीतिक प्रयास किए जाएं, ताकि उनके बेटे का पार्थिव शरीर सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव वापस लाया जा सके। साथ ही, पीड़ित परिवार ने सरकार से हरसंभव आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की भी अपील की है।





















































