अयोध्या के ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अति संवेदनशील स्थल हनुमानगढ़ी को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयानों पर बड़ा और विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने साफ किया है कि उनका पुराना बयान आधा-अधूरा समझा गया था, जिसके चलते गलतफहमी पैदा हुई। बृजभूषण सिंह ने दावा किया है कि विवादित नमाज हनुमानगढ़ी की पवित्र सीढ़ियों पर अदा नहीं की गई थी, बल्कि मंदिर के विशाल 52 बीघा क्षेत्रफल के दायरे में किसी अन्य स्थान पर पढ़ी गई थी।
मीडिया के सवाल और सफाई का पूरा सच
हाल ही में मीडिया द्वारा जब बृजभूषण शरण सिंह से यह सीधा सवाल किया गया था कि क्या वाकई हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी, तब उन्होंने तस्दीक करते हुए ‘नहीं’ में जवाब दिया था। अपने ताज़ा बयान में उन्होंने इस बात की परतें खोलते हुए कहा कि उस वक्त उनका इनकार केवल सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने के दावे तक ही सीमित था।
बृजभूषण सिंह ने मीडिया के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “मुझसे बिल्कुल सीधा सवाल पूछा गया था कि क्या सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी, जिस पर मैंने साफ इनकार कर दिया था। मुझे उसी वक्त यह बात भी जोड़नी चाहिए थी कि सीढ़ियों पर भले ही नमाज न पढ़ी गई हो, लेकिन मंदिर के 52 बीघा के विस्तृत परिसर के भीतर या फिर किसी संत के आवास के पास इस तरह की गतिविधि होना एक अलग बात है। सीढ़ियों जैसी पवित्र जगह पर ऐसा होने की बात सुनकर मैं खुद हैरान था।”
हनुमानगढ़ी के निर्माण और इतिहास पर क्या बोले बृजभूषण?
केवल नमाज के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि हनुमानगढ़ी के ऐतिहासिक निर्माण को लेकर दिए गए अपने पूर्व बयानों पर भी बृजभूषण शरण सिंह ने नया रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनका पूर्व में दिया गया यह कथन कि ‘इसका निर्माण एक मुस्लिम ने करवाया था’ पूरी तरह से अधूरा और संदर्भ से काटकर पेश किया गया था। इस बयान को ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोणों से गहराई से समझने की आवश्यकता है।
अपने तर्क को और पुख्ता करते हुए उन्होंने ‘अयोध्या माहात्म्य’ का हवाला दिया। बृजभूषण ने बताया कि इस धार्मिक ग्रंथ में भगवान शिव स्वयं माता पार्वती से इस बात का वर्णन करते हैं कि अयोध्या के मुख्य द्वार के उत्तर में स्वयं भगवान हनुमान और दक्षिण दिशा में सुग्रीव का वास है। जब स्वयं देवाधिदेव महादेव हनुमानगढ़ी के प्राचीन अस्तित्व और उसकी दिव्यता का बखान करते हैं, तो यह सोचना भी अनुचित है कि इसे किसी सामान्य व्यक्ति ने बनवाया होगा। यह कोई साधारण इमारत नहीं, बल्कि एक प्राचीन किला नुमा धार्मिक गढ़ी है।
राजनीतिक सरगर्मी और सीएम योगी का हमला
बृजभूषण शरण सिंह की तरफ से आया यह नया स्पष्टीकरण ऐसे संवेदनशील वक्त पर सामने आया है, जब हनुमानगढ़ी के इतिहास, इसकी पवित्रता और इससे जुड़े सियासी मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल आया हुआ है। इसी महीने राम मंदिर चढ़ावा विवाद के सिलसिले में अयोध्या के दौरे पर आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर की एक विशाल जनसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तल्ख लहजे में सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या कोई भी ताकत जामा मस्जिद के भीतर हनुमान चालीसा का पाठ कराने की हिम्मत जुटा सकती है? क्या सपा या कांग्रेस की कोई सरकार कभी ऐसा होने दे सकती है? फिर आखिर किस अधिकार के तहत पिछली सरकारों ने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की छूट देकर इतना बड़ा पाप किया था?
साल 2003 के पुराने विवाद की गूंज
यह पूरा संवेदनशील घटनाक्रम मूल रूप से वर्ष 2003 की उस पुरानी घटना से जुड़ा हुआ है, जब हनुमानगढ़ी के आसपास नमाज पढ़े जाने के दावों ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भारी भूचाल ला दिया था। अब एक बार फिर से भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह के इस नए और विस्तृत स्पष्टीकरण के बाद अयोध्या के इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को लेकर नए सिरे से राजनीतिक बहस छिड़ गई है और सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।





















































