श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से विदा होने के बाद चंपत राय ने पहली बार इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। राम मंदिर परिसर के दानपात्र से हुई चोरी के आरोपों से घिरे चंपत राय ने सोशल मीडिया के जरिए रामभक्तों को संबोधित करते हुए एक भावुक और दृढ़ संदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस समय भले ही शांत हों, लेकिन विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट सामने आते ही अपने ऊपर लगे एक-एक लांछन का सिलसिलेवार और तथ्यात्मक जवाब देंगे।
चौपाई के जरिए दिया ‘धैर्य’ का संदेश, खुद को बताया खुली किताब
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने आधिकारिक पत्र में चंपत राय ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों और गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई का उल्लेख किया। उन्होंने अयोध्या कांड के श्लोक को उद्धृत करते हुए लिखा:
“धीरज धरम मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥”
इस चौपाई के माध्यम से उन्होंने कठिन समय में धैर्य बनाए रखने की बात कही। चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा कि पिछले 7 जून 2026 से मंदिर परिसर के दानपात्र की गिनती के दौरान सामने आई कथित हेराफेरी को लेकर तरह-तरह की बातें बनाई जा रही हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस मामले में उनके ऊपर कई मनगढ़ंत और निराधार आरोप मढ़े गए हैं, जिसके बाद उन्होंने इस पूरे विवाद पर मौन धारण करना ही उचित समझा।
‘परम गोपनीय’ प्राथमिक रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर उठाए सवाल
चंपत राय ने जांच की प्रक्रिया और उसकी गोपनीयता को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पत्र में जिक्र किया कि जुलाई महीने में आयोजित हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सामान्य बैठक के दौरान एसआईटी (SIT) की प्राथमिक रिपोर्ट काउंसिल के सामने रखी गई थी। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जो रिपोर्ट पूरी तरह से ‘परम गोपनीय’ श्रेणी में रखी जानी चाहिए थी, वह रहस्यमयी तरीके से सार्वजनिक हो गई और मीडिया के गलियारों तक पहुंच गई।
पूर्व महासचिव ने देश-दुनिया के रामभक्तों को भरोसा दिलाते हुए लिखा, “मैं आप सभी को पूरी तरह आश्वस्त करना चाहता हूं कि जैसे ही एसआईटी की अंतिम और पूर्ण रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सामने आएगी, मैं खुद पर लगे सभी बिंदुओं और आरोपों का क्रमवार उत्तर सार्वजनिक करूंगा। उस दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और पूरा सत्य देश के सामने होगा।”
45 वर्षों का प्रचारक जीवन और अयोध्या से नाता
अपने ऊपर उठ रहे उंगलियों के बीच चंपत राय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता के रूप में बिताए अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का भी स्मरण किया। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा कि संगठन ने उन्हें अक्टूबर 1991 में अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपकर भेजा था।
उन्होंने आगे कहा, “मेरा प्रचारक जीवन करीब 45 वर्षों का रहा है। इस लंबी अवधि में मैं समाज के बीच जहां भी रहा, मेरा व्यक्तिगत और संगठनात्मक जीवन हमेशा एक खुली पुस्तक की तरह रहा है, जिसे कोई भी देख और समझ सकता है।” अपने पत्र के समापन में उन्होंने बेहद शालीनता से सभी शुभचिंतकों और भक्तों को आदरपूर्वक नमन किया।
ट्रस्ट की बैठक में स्वीकार हुआ इस्तीफा, कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव
गौरतलब है कि सोमवार को अयोध्या में आयोजित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हाई-प्रोफाइल बैठक में चंपत राय का महासचिव पद से दिया गया इस्तीफा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था। दानपात्र विवाद और चोरी के आरोपों के बाद संगठन की साख पर आंच न आए, संभवतः इसी को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा फैसला लिया गया।
चंपत राय के पदमुक्त होने के बाद ट्रस्ट के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए कृष्ण मोहन को नए महासचिव की पूर्णकालिक नियुक्ति होने तक अंतरिम महासचिव की कमान सौंपी गई है। फिलहाल पूरी अयोध्या और रामभक्तों की नजरें अब एसआईटी की आने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।



















































