उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में शनिवार की सुबह एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। सिन्दुरवा रेलवे स्टेशन के नजदीक उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब उर्वरक (यूरिया) से लदी हुई एक मालगाड़ी के अचानक सात डिब्बे पटरी से उतर गए। इस भीषण दुर्घटना के कारण सीधे इंडोरामा उर्वरक संयंत्र तक जाने वाला रेल मार्ग और परिचालन पूरी तरह से ठप हो गया है। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है, जिससे प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
सुबह-ससुबह हुआ हादसा, पटरी से उतरे सात वैगन
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना शनिवार को तड़के करीब पांच बजे के आसपास की है। यूरिया खाद लेकर जा रही मालगाड़ी जब सिंदुरवा रेलवे स्टेशन और स्थानीय उर्वरक फैक्टरी के बीच के हिस्से से गुजर रही थी, तभी अचानक ट्रेन के संतुलन बिगड़ने से उसके सात डिब्बे पटरी से नीचे उतर गए। डिब्बे उतरने के साथ ही तेज आवाज गूंज उठी और मौके पर हड़कंप मच गया। घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और रेलवे के तकनीकी दल सूचना मिलते ही तत्परता के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए।
मुख्य रेल मार्ग रहा सुरक्षित, लखनऊ-सुल्तानपुर रूट पर असर नहीं
हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित मुस्तैदी दिखाई। स्थानीय थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस दुर्घटना की चपेट में आने से किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि इस मालगाड़ी के बेपटरी होने का मुख्य लखनऊ–सुल्तानपुर रेलखंड पर चलने वाली नियमित यात्री ट्रेनों या अन्य रेल परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है। मुख्य ट्रैक सुरक्षित होने के कारण बड़ी और लंबी दूरी की ट्रेनों का आवागमन सामान्य रूप से जारी रहा, जिससे एक बड़ा संकट टल गया।
युद्धस्तर पर चल रहा मरम्मत कार्य, जल्द बहाली की उम्मीद
दुर्घटना के कारण हालांकि इंडोरामा उर्वरक संयंत्र तक जाने वाले इंडस्ट्रियल रेल मार्ग की पटरियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे खाद की ढुलाई और आपूर्ति बाधित हुई है। रेलवे और संबंधित संयंत्र के उच्च अधिकारी मौके पर कैंप किए हुए हैं। पटरी से उतरे डिब्बों को हटाने और क्षतिग्रस्त पटरियों को दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रशासनिक अमले का प्रयास है कि जल्द से जल्द ट्रैक को ठीक करके उर्वरक संयंत्र तक रेल परिचालन को सुचारू रूप से बहाल किया जाए, ताकि आपूर्ति व्यवस्था में किसी प्रकार की लंबी बाधा उत्पन्न न हो।





















































