उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों का असंतोष लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। नियुक्ति की मांग को लेकर संघर्षरत आरक्षित वर्ग के सैकड़ों छात्र शनिवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के लखनऊ स्थित आवास के बाहर जा पहुंचे। ‘बहन जी बाहर निकलो’ के गूंजते नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने और उनकी मांगों का समर्थन करने की पुरजोर गुहार लगाई। हालांकि, सुरक्षा में तैनात पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ा और हिरासत में लेकर बसों के जरिए इको गार्डन भेज दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे पर गहराया विवाद
इस पूरे प्रदर्शन की मुख्य वजह हाल ही में उच्चतम न्यायालय में पेश किया गया वह हलफनामा है, जो बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 21 जुलाई को सुनवाई के दौरान दिया गया था। आंदोलन का नेतृत्व संभाल रहे धनंजय गुप्ता के मुताबिक, विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़े पूरी तरह भ्रामक और जमीनी हकीकत से परे हैं, जिससे अभ्यर्थियों में भारी रोष व्याप्त है। हलफनामे में कुल 8,270 पदों को रिक्त बताए जाने का जिक्र है, जिनमें से 3,324 पद केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के ऐसे हैं जिन पर नियमानुसार पहले ही नियुक्तियां हो जानी चाहिए थीं।
खाली पदों और नियुक्ति प्रक्रिया पर खड़े किए गंभीर सवाल
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने अपने हलफनामे में लगभग 4,946 ऐसे पद भी दिखाए हैं, जिन पर चयनित उम्मीदवारों के कार्यभार ग्रहण करने के लिए न आने की बात कही गई है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि इन सीटों पर पूर्व चयनित लोगों ने ज्वाइन नहीं किया है, तो इन पदों को स्वतः रिक्त मानकर मेरिट सूची में नीचे की पायदान पर खड़े योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए था।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस समय सामान्य वर्ग के 1,144, ओबीसी के 2,524, अनुसूचित जाति (एससी) के 1,244 और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 34 पद खाली पड़े हैं। प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि इससे पहले भी शासन स्तर पर करीब 6,800 रिक्तियों का हवाला दिया जा चुका है, लेकिन कागजी दावों के बावजूद धरातल पर नियुक्ति की प्रक्रिया को आज तक मुकाम तक नहीं पहुंचाया गया है।
महिला अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और पुलिस की सख्ती
शनिवार को चले इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थी भी शामिल थीं, जो मायावती के सरकारी आवास के बाहर धरने पर बैठ गईं। वे बसपा सुप्रीमो से मिलकर अपना दुखड़ा रोना चाहती थीं और न्याय की गुहार लगा रही थीं। हालात की गंभीरता को भांपते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और वहां से हटाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने तो उन्हें जबरन हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया और इको गार्डन के लिए रवाना कर दिया गया। अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि राजनीतिक दल उनके हक की इस लड़ाई में खुलकर सामने आएं और सरकार पर दबाव बनाएं।





















































