संसद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की सरकारों पर शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। संसद में एक महत्वपूर्ण विधायी चर्चा के दौरान उन्होंने दावा किया कि देश और प्रदेश में शिक्षण संस्थानों का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। सपा प्रमुख के इन तीखे बयानों ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से शिक्षा के अधिकार और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
‘विलय के फेर में बंद हो गए हजारों प्राथमिक विद्यालय’
लोकसभा के भीतर ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर अपनी बात रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारें भले ही शिक्षा प्रणाली में सुधार के लाख दावे करें, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त दावों से कोसों दूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे देश में लगभग एक लाख से अधिक प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लगाए जा चुके हैं, और इस मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है।
संसद भवन परिसर के बाहर मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने इन आंकड़ों को विस्तार दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही सरकार इसे स्कूलों का ‘विलय’ (मर्जर) बताकर पर्दा डालने का प्रयास कर रही हो, लेकिन सच यही है कि प्रदेश में ऐसे करीब 22,000 प्राथमिक विद्यालयों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि इस सूची में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के भी बड़ी संख्या में स्कूल शामिल हैं।
प्रवेश में कमी और रोजगार के मुद्दों पर उठाए सवाल
प्राथमिक विद्यालयों के साथ-साथ उच्च और तकनीकी शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में छात्रों के प्रवेश का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार युवाओं को रोजगार मुहैया कराने और उनके संवैधानिक अधिकारों यानी आरक्षण की रक्षा करने के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।
सरकार की ओर से पलटवार: ‘कोई स्कूल बंद नहीं हुआ, केवल हुआ है विलय’
अखिलेश यादव के इन तमाम गंभीर आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कड़ा खंडन सामने आया है। राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने सपा प्रमुख के बयानों को पूरी तरह से ‘निराधार’ और भ्रामक करार दिया है।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने एक भी सरकारी प्राथमिक विद्यालय को बंद नहीं किया है। उन्होंने समझाया कि जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम थी, केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए उनका पास के नजदीकी विद्यालयों में सुगम ‘विलय’ किया गया है ताकि बच्चों को बेहतर संसाधन और शिक्षक मिल सकें।































