उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक औचक निरीक्षण के दौरान जब स्कूल के रजिस्टर की जांच की गई, तो सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच भारी अंतर पाया गया। उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) में हेरफेर और बच्चों की संख्या को लेकर की गई धांधली के गंभीर आरोपों के चलते जिला प्रशासन ने स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
बीईओ के औचक निरीक्षण में खुली पोल
जिले के पलिया ब्लॉक स्थित कोठिया उच्च प्राथमिक विद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें तब उतरीं, जब खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने वहां औचक निरीक्षण किया। बीएसए प्रवीण तिवारी ने जानकारी दी कि निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे बेहद आपत्तिजनक थे। रजिस्टर में छात्रों की मौजूदगी कुछ और थी, जबकि कक्षा में छात्र संख्या नगण्य थी। इस रिपोर्ट के आधार पर बीएसए ने कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी प्रधानाध्यापक उमेश कुमार सागर को सस्पेंड कर दिया है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए अब कुम्भी ब्लॉक के बीईओ को जांच अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
रिकॉर्ड बनाम हकीकत: आंकड़ों का बड़ा खेल
निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, इस धांधली की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 30 अप्रैल को जब स्कूल का रिकॉर्ड खंगाला गया, तो रजिस्टर में 51 छात्रों की उपस्थिति दर्ज थी। हालांकि, जब बीईओ ने कक्षावार जांच की, तो 99 नामांकित छात्रों में से मौके पर सिर्फ 16 छात्र ही पाए गए।
केवल एक दिन की बात नहीं है, बल्कि इससे पहले 20 फरवरी को भी स्कूल की बदहाली और अनियमितता का यही हाल था। उस दिन स्कूल में कुल 133 नामांकित छात्र थे, जिनमें से मात्र तीन बच्चे ही स्कूल पहुंचे थे। वहीं, उस तारीख से ठीक पहले के दो दिनों का रिकॉर्ड देखा जाए तो रजिस्टर में रोजाना 75 से 89 बच्चों की उपस्थिति दिखाई गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि अनाज और बजट के दुरुपयोग के उद्देश्य से जानबूझकर उपस्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा था।
गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता
प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ केवल मिड-डे मील में घोटाले के ही आरोप नहीं हैं। बीईओ की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हेडमास्टर बिना किसी विधिवत अवकाश की सूचना दिए स्कूल से अनुपस्थित रहते थे। साथ ही, शैक्षणिक मानकों की घोर अनदेखी करना और पठन-पाठन के प्रति उदासीनता बरतना भी उनके निलंबन का प्रमुख कारण बना है। प्रशासन का कहना है कि स्कूली व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।





















































