उत्तर प्रदेश की सियासत में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मंदिर के चंदे और चढ़ावे में हेरफेर के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद जगदंबिका पाल ने अखिलेश यादव के इस बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि सपा प्रमुख ने ऐसे बेबुनियाद आरोप लगाकर देश-दुनिया के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और रामभक्तों की पावन भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आस्था के केंद्र पर इस तरह की ओछी राजनीति को किसी भी संवेदनशील समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कारसेवकों पर गोलीबारी के इतिहास की दिलाई याद
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने लखनऊ में समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) से विशेष बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के पुराने इतिहास को खंगाला। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस कड़वे सच को कभी नहीं भूल सकती कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी ने हमेशा से प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण का चौतरफा विरोध किया था। अतीत का जिक्र करते हुए उन्होंने सपा सरकार के उस दौर की याद दिलाई जब अयोध्या की सड़कों पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे निहत्थे कारसेवकों पर बर्बरतापूर्वक गोलियां चलवाई गई थीं। जगदंबिका पाल ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जो दल रामभक्तों के खून से सने इतिहास से जुड़ा हो, उसके मुखिया द्वारा आज मंदिर की पवित्र व्यवस्था और श्रद्धालुओं की श्रद्धा से अर्पित चढ़ावे पर इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाना बेहद शर्मनाक है।
बाबरी मस्जिद के चंदे से तुलना कर ‘दोहरे रवैये’ पर प्रहार
अखिलेश यादव की घेराबंदी करते हुए भाजपा सांसद ने बाबरी मस्जिद के नाम पर आने वाले चंदे का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि बाबरी मस्जिद के नाम पर भी विभिन्न माध्यमों से श्रद्धालुओं द्वारा भारी मात्रा में दान और चंदा दिया जाता रहा है, लेकिन अखिलेश यादव या उनकी पार्टी के किसी नेता ने आज तक उस धन की व्यवस्था अथवा पारदर्शिता पर एक भी सवाल क्यों नहीं खड़ा किया?
पाल ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे पर उंगली उठाना और दूसरी तरफ चुप्पी साध लेना, समाजवादी पार्टी के वैचारिक खोखलेपन और साफ तौर पर उनके दोहरे चरित्र को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की प्रबुद्ध जनता अब विपक्ष के इस छद्म व्यवहार को बहुत अच्छी तरह समझ चुकी है।
“तुष्टिकरण की राजनीति की सभी सीमाएं लांघी”
धार्मिक मामलों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्षी दल केवल एक खास वर्ग के वोट बैंक को साधने के लिए इस स्तर पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा:
“वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति की एक लोकतांत्रिक और नैतिक सीमा होती है। बेहद अफसोस की बात है कि अखिलेश यादव ने राजनीतिक लाभ के लिए उस लक्ष्मण रेखा को भी पार कर दिया है। करोड़ों लोगों की अटूट आस्था पर सीधा प्रहार करके उन्होंने खुद को विकास और जनसरोकारों की राजनीति से पूरी तरह दूर कर लिया है।”
सांसद ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में जनता अपनी आस्था के इस अपमान का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से जरूर देगी।
विपक्ष के आंतरिक मतभेदों और ‘इंडिया’ गठबंधन पर तंज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की हालिया बैठक में अखिलेश यादव द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दी गई राजनीतिक नसीहतों और अंदरूनी खींचतान पर भी भाजपा ने तंज कसा है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष की एकजुटता के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए विपक्षी दलों के गठजोड़ पर करारा प्रहार किया।
विपक्ष का गणित बनाम भाजपा का संकल्प:
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│ सपा + कांग्रेस + बसपा (एक साथ या अलग) │
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┌────────────────────────────────────────┐
│ उत्तर प्रदेश में खिलेगा 'कमल' │
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│ भारी बहुमत से तीसरी बार भाजपा सरकार │
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उप्र के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आगामी राजनीतिक जंग में चाहे समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) आपस में मिलकर चुनाव मैदान में उतरें या फिर अलग-अलग होकर अपनी किस्मत आजमाएं, उत्तर प्रदेश की जनता का झुकाव स्पष्ट है। सूबे के कोने-कोने में केवल ‘कमल’ ही खिलने जा रहा है। केशव प्रसाद मौर्य ने पूर्ण विश्वास के साथ दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी प्रचंड और ऐतिहासिक बहुमत के साथ तीसरी बार केंद्र में अपनी सरकार बनाने जा रही है, और विपक्ष के तमाम गुमराह करने वाले हथकंडे पूरी तरह विफल साबित होंगे।





















































