गाजियाबाद के बहुचर्चित सूर्या हत्याकांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। सीएम योगी के ‘दोस्ती की आड़ में विश्वासघात’ वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए विपक्षी सांसदों ने सूबे की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेताओं का आरोप है कि सरकार अपराधियों के खिलाफ चयनात्मक कार्रवाई कर रही है, जिससे राज्य में अपराध नियंत्रण पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
गाजियाबाद हत्याकांड पर सीएम योगी का बयान और विपक्ष की आपत्ति
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गाजियाबाद के सूर्या हत्याकांड को लेकर एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने साफ लहजे में कहा था कि ‘दोस्ती की आड़ में विश्वासघात और पीठ में छुरा घोंपने जैसी घटनाएं किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।’ मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मोर्चा खोल दिया।
आईएएनएस (IANS) से विशेष बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि मुख्य आरोपी असद को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया, जो पुलिस की अपनी प्रक्रिया हो सकती है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि दोस्ती के नाम पर मारे गए अन्य युवाओं के मामलों पर सरकार चुप क्यों है? मसूद ने पूछा, “उस एथलीट त्यागी लड़के का क्या हुआ, जो दोस्ती के नाम पर ही मारा गया था? उसके बारे में मुख्यमंत्री कुछ क्यों नहीं बोलते? गाजीपुर में रंगदारी के लिए जो हत्या हुई या जिस मासूम बच्चे को पटक-पटक कर मार डाला गया, उन घटनाओं पर सरकार की जुबान क्यों बंद है? हत्या तो आखिर हत्या ही होती है, उसे धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।”
‘अपराधी सिर्फ अपराधी होता है’ – इमरान मसूद का कानून-व्यवस्था पर प्रहार
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि राज्य में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और धरातल पर कोई सकारात्मक आउटपुट दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने न्याय प्रणाली में निष्पक्षता की वकालत करते हुए कहा कि अपराधी का कोई धर्म या जाति नहीं होती।
मसूद ने तीखे लहजे में कहा, “मैंने पहले भी स्पष्ट किया है कि अगर उत्तर प्रदेश प्रशासन जाति और मजहब देखकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा तय करेगा, तो राज्य में कानून का इकबाल कभी कायम नहीं हो पाएगा। जो इलाज और जो सख्त कानूनी कार्रवाई एक अपराधी पर लागू होती है, वही बिना किसी भेदभाव के हर उस शख्स पर लागू होनी चाहिए जो कानून तोड़ता है।”
गोवंश संरक्षण और बीफ एक्सपोर्ट पर सरकार को घेरा
बातचीत के दौरान इमरान मसूद ने गायों के संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार के एक फैसले का हवाला देते हुए केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
मसूद ने कहा, “अगर गौमाता को पूजनीय माना जाता है, तो क्या वह सिर्फ 14 साल की उम्र तक ही गौमाता रहेंगी? बंगाल सरकार ने 14 साल से अधिक उम्र की गायों को लेकर जो नीतियां बनाई हैं, उस पर बीजेपी चुप क्यों है? अगर सरकार वास्तव में गोवंश को लेकर गंभीर है, तो देश में बीफ एक्सपोर्ट (गोमांस निर्यात) पर पूरी तरह से प्रतिबंध क्यों नहीं लगा दिया जाता? आप इसे पूरी तरह से काटना बैन क्यों नहीं करते?”
‘योगी को अपनी खास पहचान खोने का डर’ – सपा सांसद अवधेश प्रसाद का तंज
इस पूरे सियासी विवाद में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और फैजाबाद (अयोध्या) से सांसद अवधेश प्रसाद भी कूद पड़े हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक शैली पर तंज कसते हुए कहा कि सीएम योगी की प्रदेश और देश के भीतर एक खास तरह की राजनीतिक पहचान बनी हुई है।
अवधेश प्रसाद ने कहा, “मुख्यमंत्री को हमेशा इस बात की चिंता सताती रहती है कि वह जिस खास विचारधारा के प्रतीक माने जाते हैं, कहीं उनकी वह पहचान धुंधली न पड़ जाए। यही वजह है कि वह अक्सर ऐसे बयानों का सहारा लेते हैं जो उनकी राजनीतिक लाइन को सूट करते हैं, भले ही जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल अलग हो।”
यूपी पुलिस के एनकाउंटर राज पर खड़े किए गंभीर सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद ने उत्तर प्रदेश में लगातार हो रहे पुलिस एनकाउंटर्स को लेकर भी योगी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने न्यायपालिका की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में और कानून के राज के तहत ‘एनकाउंटर’ जैसी प्रवृत्तियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा से ही मानवाधिकारों के उल्लंघन और गैर-कानूनी एनकाउंटर्स के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों के दौरान किए गए कई पुलिस एनकाउंटर पूरी तरह से फर्जी थे, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी बेहद जरूरी है ताकि कानून के शासन पर जनता का भरोसा बना रहे।
गाजियाबाद की घटना से शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह से सांप्रदायिक बनाम निष्पक्ष न्याय की सियासी बहस में तब्दील हो चुका है। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सख्त संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे चयनात्मक और भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताकर सरकार को घेर रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था हमेशा से एक बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा रही है, और विपक्षी सांसदों के इन तीखे तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में यह सियासी जंग और ज्यादा तेज होने वाली है।





















































