समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वालीं महिला विधायक पूजा पाल ने अपने पूर्व अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने एक पोस्ट के जरिए पूजा पाल ने अखिलेश यादव को आईना दिखाते हुए उस सवाल का सार्वजनिक जवाब दिया है, जो सपा मुखिया ने उनसे भाजपा में जाने को लेकर किया था। इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है।
‘अखिलेश जी, सुनिए भाजपा में मुझे क्या मिला…’
विधायक पूजा पाल ने अपने पोस्ट की शुरुआत सीधे अखिलेश यादव के उस सवाल से की, जिसमें उनसे पूछा गया था कि आखिर उन्हें भाजपा में शामिल होकर क्या हासिल हुआ। इस सवाल का जवाब देते हुए पूजा पाल ने कहा कि उन्हें भाजपा में वो सम्मान और अवसर मिला है, जो एक सामान्य परिवार से आने वाले व्यक्ति के लिए सपना होता है। उन्होंने कहा, “मुझे इस बात का गर्व है कि मैं पाल समाज की एक बेटी हूं और आज भारतीय जनता पार्टी की एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हूं।”
योग्यता का सम्मान और अवसरों का आकाश
भाजपा की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए उन्होंने पार्टी में मौजूद लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। पूजा पाल ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी राजनीतिक शक्ति है, जहां किसी भी सामान्य पृष्ठभूमि से आए व्यक्ति की मेहनत और क्षमता को पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि यहां किसी पद के लिए किसी विशेष परिवार में जन्म लेने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि व्यक्ति की खुद की काबिलियत ही उसे सर्वोच्च पदों तक ले जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के मंच पर पाल समाज के किसी भी बेटे या बेटी के लिए संभावनाएं असीमित हैं। उन्होंने गिनाया कि पार्टी में एक कार्यकर्ता के तौर पर शामिल होकर व्यक्ति विधायक, सांसद, मंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक और राजनीतिक पदों तक पहुंचने का सामर्थ्य रखता है। यह भाजपा की कार्यसंस्कृति है, जो जमीनी स्तर के कार्यकर्ता को राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का अवसर देती है।
सपा पर साधा निशाना: सीमित परिवारों का है बोलबाला
समाजवादी पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए पूजा पाल ने आरोप लगाया कि वहां का नेतृत्व कुछ गिने-चुने परिवारों और चंद चेहरों के इर्द-गिर्द सिमटकर रह गया है। उन्होंने सपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सामान्य कार्यकर्ताओं और बहुजन समाज के अन्य वर्गों के लिए आगे बढ़ने की संभावनाएं पहले भी नगण्य थीं और आज भी वैसी ही स्थिति है। उनके अनुसार, सपा में अवसर केवल पारिवारिक निष्ठा और खास चेहरों तक ही सीमित हैं, जिससे आम कार्यकर्ता का मनोबल गिरता है।
पूजा पाल के इस तीखे बयानों ने समाजवादी पार्टी के भीतर व्याप्त असंतोष की खबरों को एक बार फिर हवा दे दी है। उनके इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या भाजपा की ‘परिवारवाद मुक्त’ होने की छवि वास्तव में अन्य दलों के असंतुष्ट नेताओं को अपनी ओर खींचने में सफल हो रही है।





















































