रामपुर: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। अदालत से रिहाई का परवाना मिलने के बाद जैसे ही दोनों पिता-पुत्र जेल की चहारदीवारी से बाहर कदम रखने की तैयारी में थे, केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों को अपने कब्जे में ले लिया। इस आकस्मिक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और भारी संख्या में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान ईडी अधिकारियों के साथ मौजूद दिखे। प्राथमिक सूत्रों के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं की रोकथाम से जुड़े कानून (पीएमएलए) के तहत जल्द ही उनकी विधिवत गिरफ्तारी दर्ज की जा सकती है।
उच्च न्यायालय से मिली थी राहत, पर अधूरी रह गई रिहाई की उम्मीद
रामपुर सदर सीट से दस मर्तबा विधायक का चुनाव जीतने वाले आजम खान और उनके पूर्व विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम को जाली पैन कार्ड से संबंधित एक विवाद में निचली अदालत ने सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से हाल ही में उनकी इस सजा को निलंबित करने का आदेश पारित किया गया था। इस राहत के आधार पर स्थानीय एमपी/एमएलए विशेष अदालत ने दोनों नेताओं के लिए जेल से रिहाई के औपचारिक आदेश जारी कर दिए थे। परिजनों और पार्टी समर्थकों को उम्मीद थी कि दोनों नेता खुली हवा में सांस ले सकेंगे, परंतु इससे पहले कि वे बाहर आ पाते, वित्तीय जांच एजेंसी ने दस्तक देकर उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया।
जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़ी वित्तीय हेराफेरी पर जांच की आंच
केंद्रीय एजेंसी की यह सख्त कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट एवं मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में हुए कथित भारी वित्तीय गबन से संबंधित है। आरोप है कि सरकारी विकास कार्यों के ठेकों से आने वाले सार्वजनिक धन को निजी ठेकेदारों के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित किया गया और बाद में इस रकम का उपयोग जौहर ट्रस्ट तथा विश्वविद्यालय परिसर की संपत्तियों को खड़ा करने में किया गया। इसी वित्तीय अनियमितता और शोधन की पड़ताल के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने 13 अक्टूबर को रामपुर कारागार पहुंचकर आजम खान से गहन पूछताछ भी की थी। जांच एजेंसी अब इस लेन-देन की कड़ियों को आपस में जोड़ते हुए आगे की वैधानिक कार्रवाई को अंजाम दे रही है।
पुराने विवादों और मुकदमों के घेरे में लंबा सफर
उल्लेखनीय है कि पूर्व मंत्री आजम खान गत वर्ष नवंबर माह से रामपुर जिला जेल की सलाखों के पीछे निरुद्ध हैं। वर्ष 2019 के आम संसदीय चुनाव के प्रचार के दौरान प्रशासनिक मशीनरी और सरकारी अफसरों के विरुद्ध अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल समेत फर्जीवाड़े से जुड़े कई मामलों में वे कानूनी चक्रव्यूह में उलझे हुए हैं। अब जब वे अदालत के फैसले के बाद रिहाई की चौखट पर पहुंचे थे, तभी मनी लॉन्ड्रिंग की इस नई कार्रवाई ने उनके लिए कानूनी संघर्ष का एक और दौर शुरू कर दिया है।












































