राजधानी लखनऊ में अखिल भारत हिंदू महासभा ने मंगलवार को कथित धर्मांतरण की बढ़ती गतिविधियों और संदिग्ध वित्तीय स्रोतों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के प्रांतीय व राष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने सड़कों पर उतरकर शासन-प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि राज्य में सक्रिय धर्मांतरण सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए, जो इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल सके।
विदेशी फंडिंग और ‘चंगाई सभाओं’ के जरिए धर्मांतरण का आरोप
विरोध प्रदर्शन के दौरान शिशिर चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाई मिशनरियों का प्रभाव सुनियोजित तरीके से बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे खेल के पीछे भारी-भरकम विदेशी फंडिंग और अंतर्राष्ट्रीय ताकतों का हाथ होने की पूरी संभावना है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को लक्षित किया जा रहा है। इन असहाय लोगों की गरीबी, बीमारी और मजबूरियों का अनुचित लाभ उठाकर, मुफ्त इलाज, वित्तीय प्रलोभन और कथित ‘चंगाई सभाओं’ के अंधविश्वास के नाम पर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। ग्रामीण और सुदूर कस्बाई इलाकों में इस तरह के अवैध नेटवर्क तेजी से पांव पसार रहे हैं।
चर्चों की भू-संपत्तियों और लीज डीड की राजस्व जांच की मांग
हिंदू महासभा ने केवल धर्मांतरण का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि चर्चों, क्रिश्चियन स्कूलों और उनसे जुड़ी संपत्तियों के मालिकाना हक पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि प्रदेश भर में कई स्थानों पर मिशनरी संस्थाओं के पास विशाल भू-भाग हैं, जिनका उपयोग वे दशकों से कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इन तमाम जमीनों की लीज डीड, राजस्व अभिलेखों और कानूनी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन संपत्तियों की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है या जहां नियमों का उल्लंघन कर सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, उन्हें तुरंत चिन्हित कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति बने धार्मिक स्थलों का हो सर्वे
प्रदर्शनकारियों ने ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों में बिना प्रशासनिक अनुमति के बनाए जा रहे चर्चों का मुद्दा भी प्रमुखता से रेखांकित किया। हिंदू महासभा के नेताओं ने कहा कि किसी भी नए धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए स्थानीय निकाय और जिला प्रशासन से विधिवत मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद, दूरदराज के गांवों में बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इन गतिविधियों की खबर नहीं है? संगठन ने सरकार से मांग की कि पूरे प्रदेश में सर्वे कराकर वैध और अवैध रूप से संचालित हो रहे ऐसे सभी स्थलों की सूची तैयार की जाए और अवैध निर्माणों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई और विदेशी अनुदान नियमों के पालन पर जोर
प्रदर्शन के दौरान शिशिर चतुर्वेदी ने कानून के क्रियान्वयन में निष्पक्षता का मुद्दा उठाते हुए दारा सिंह पाल, आसाराम बापू और गौतम खट्टर जैसे मामलों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दारा सिंह पाल ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के मामले में अपनी सजा काट चुके हैं, फिर भी उनसे जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब हिंदूवादी विचारकों या नेताओं के खिलाफ मामले आते हैं तो तुरंत कड़ी कार्रवाई होती है, जबकि धर्मांतरण कराने वाले बड़े सिंडिकेट्स पर नरमी बरती जाती है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा विदेशी अंशदान (नियंत्रण) अधिनियम (FCRA) को लेकर उठाए गए सख्त कदमों का समर्थन करते हुए दोहराया कि विदेशी धन के अनुचित उपयोग और अवैध धार्मिक गतिविधियों में लिप्त किसी भी संस्था को बख्शा नहीं जाना चाहिए।





















































