उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यावरण असंतुलन और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बीच प्रदेशवासियों से प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक बड़ी अपील की है। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषयक संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल और जंगल का संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सीएम योगी ने जनमानस से आह्वान किया कि वे जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया और खनन माफियाओं के खिलाफ पूरी तरह सजग रहें। इसके साथ ही, उन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों पर भी कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यदि कोई टोंटी चोरी कर रहा हो या व्यर्थ में पानी बहा रहा हो, तो समाज के लोगों को आगे आकर ऐसे लोगों को टोकना चाहिए।
‘एक पेड़ मां के नाम’ और 5 बड़े पर्यावरण संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए पांच महत्वपूर्ण संकल्प दिलाए। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाना, लगाए गए पौधों की शरारती तत्वों और जीव-जंतुओं से सुरक्षा करना, जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाना, सिंगल यूज प्लास्टिक का पूरी तरह से बहिष्कार करना और अपनी जीवनशैली को प्रकृति के अनुकूल ढालना शामिल है। कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने एक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों को चॉकलेट बांटी, आम नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए कपड़े के झोले वितरित किए, बच्चों संग सेल्फी ली और ‘वृक्ष कलश’ में जल अर्पित कर प्रकृति प्रेम का अनूठा संदेश दिया।
मौसम चक्र में बदलाव: किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा
अपने संबोधन में जल और वन की महत्ता पर जोर देते हुए सीएम योगी ने कहा, “जल है तो कल है, वन है तो जीवन है।” उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पिछले 25 वर्षों में प्रकृति के साथ हुए अत्यधिक खिलवाड़ के कारण मौसम चक्र में एक से डेढ़ महीने का बड़ा अंतर आ गया है। उत्तर प्रदेश और भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, ऐसे में इस बदलाव का सबसे बड़ा और सीधा खामियाजा हमारे अन्नदाताओं (किसानों) को भुगतना पड़ेगा। अतिवृष्टि (जरूरत से ज्यादा बारिश) और अनावृष्टि (सूखा) जैसी बेमौसम आपदाएं भविष्य में गंभीर खाद्यान्न संकट पैदा कर सकती हैं। मुख्यमंत्री ने सचेत किया कि प्रकृति की ये चेतावनियां हमें अपनी गलतियां सुधारने का अंतिम अवसर दे रही हैं।
संस्कृति, परंपरा और प्रकृति का अनूठा संगम
मुख्यमंत्री ने भारतीय ऋषि परंपरा और ग्रंथों का हवाला देते हुए प्रकृति के साथ मानवीय जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने रामायण काल का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि लंका विजय के पश्चात भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा था—”जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात जन्म देने वाली माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं। आज के संदर्भ में अपनी धरती और प्रकृति के प्रति इसी कृतज्ञता को निभाने की आवश्यकता है। सीएम ने कहा कि सनातन परंपरा में शिव के गले में सर्प, कार्तिकेय का मयूर, गणेश जी का मूषक और मां भगवती का शेर—ये सभी जीव-जंतु पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का हिस्सा हैं। भारतीय संस्कृति में गोमाता, बैल और किसान मित्र के रूप में सर्प को जो सम्मान दिया गया है, वह हमारे पर्यावरण संरक्षण के प्राचीन विज्ञान को ही दर्शाता है।
रामसर साइट्स की संख्या 1 से 13 हुई, झीलों का हो रहा पुनरुद्धार
जल संरक्षण के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां गिनाते हुए सीएम योगी ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। 2017 से पहले यूपी में मात्र एक रामसर साइट थी, लेकिन आज इनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है। हाल ही में स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि बलिया के ‘सुरहा ताल’ को 13वीं रामसर साइट घोषित किया गया है। इसके अलावा, गोरखपुर के 1400 एकड़ में फैले रामगढ़ ताल और फर्टिलाइजर कारखाने के पास 400-500 एकड़ के चिलुआताल का सफलतापूर्वक संरक्षण किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि भयंकर गर्मी में जहां शहर का तापमान 45 डिग्री होता है, वहीं इन संरक्षित झीलों और वन क्षेत्रों (जैसे कुकरैल वन) के पास का तापमान 40 या 35 डिग्री से भी कम महसूस होता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ रिकॉर्ड पौधरोपण का कीर्तिमान
सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज एक्सप्रेसवे और मल्टी-लेन सड़कों का सबसे बड़ा हब बन गया है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के इस विकास ने पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया है। पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में वन विभाग की नर्सरी में बमुश्किल 5 लाख पौधे मिलते थे, लेकिन आज सरकारी और निजी नर्सरियों में 55 करोड़ पौधे रोपण के लिए तैयार हैं। सरकार ने इस वर्ष भी एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का विशाल लक्ष्य रखा है।
उन्होंने ग्राम प्रधानों, नगर निकायों के अध्यक्षों और महापौरों को निर्देशित किया कि वे अपने क्षेत्रों में पुराने तालाबों, कुंओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित करें तथा नदियों के कैचमेंट एरिया को अतिक्रमण से मुक्त कराएं। इस अहम संगोष्ठी में वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, केपी मलिक, प्रमुख सचिव वन वी. हेकाली झिमोमी, और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आरपी सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और पर्यावरणविद् मौजूद रहे।





















































