भगवान राम की पावन नगरी अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में जेठ माह के पांचवें और अंतिम मंगलवार को आस्था का ऐसा विहंगम नजारा देखने को मिला, जिसने श्रद्धा के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। भोर की पहली किरण से ही लाखों भक्तों की कतारें बजरंगबली के दर्शन के लिए उमड़ पड़ीं, जहां भीषण गर्मी के बीच प्रशासन के चाक-चौबंद इंतजामों ने श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया और उन्हें एक अलौकिक अनुभूति कराई।
भोर की पहली किरण के साथ उमड़ा आस्था का सैलाब
धार्मिक नगरी अयोध्या इन दिनों पूरी तरह से भक्ति के रंग में सराबोर है। जेठ माह के पांचवें और विशेष मंगलवार को लेकर श्रद्धालुओं में एक अलग ही उत्साह और श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। रात के तीसरे पहर से ही श्रद्धालु सरयू नदी में पावन स्नान करने के बाद हनुमानगढ़ी की तरफ कूच करने लगे थे। सुबह होते-होते मुख्य मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक केवल ‘बजरंगबली की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारे गूंजने लगे।
इस बार जेठ के इस अंतिम मंगलवार को लेकर न केवल स्थानीय लोग बल्कि विभिन्न राज्यों और जिलों से आए श्रद्धालुओं की तादाद लाखों में पहुंच गई। मंदिर की सीढ़ियों से लेकर बाहरी बैरिकेडिंग तक कतारें लगातार बढ़ती गईं, लेकिन भक्तों के चेहरे पर थकान की जगह सिर्फ हनुमान जी के दर्शन की व्याकुलता और अटूट आस्था की चमक दिखाई दे रही थी।
ज्येष्ठ मास के मंगलवार का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व
सनातन परंपरा में जेठ (ज्येष्ठ) मास के मंगलवार का हनुमान साधना के लिए सर्वोत्तम महत्व माना गया है। इसे उत्तर भारत में ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के रूप में बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम से हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी, जिसके बाद से इस महीने के मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
चूंकि इस बार जेठ के महीने में 5 मंगलवार का विशेष संयोग बना, इसलिए इस पांचवें मंगलवार को भक्तों ने बेहद फलदायी और कष्टनिवारक माना। अपने दुखों को हरने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर इतनी बड़ी संख्या में भक्तों ने हनुमान जी के चौखट पर माथा टेका और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
भीषण गर्मी में प्रशासन का ‘सुरक्षा कवच’ और क्राउड मैनेजमेंट
इतने बड़े पैमाने पर उमड़ी भीड़ को संभालना और इस भीषण गर्मी में उन्हें सुरक्षित रखना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। हालांकि, अयोध्या जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने पहले से ही इसके लिए एक व्यापक क्राउड मैनेजमेंट प्लान तैयार कर रखा था। मंदिर के प्रवेश और निकास द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों की तैनात की गई थी ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
तीखी धूप को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ख्याल रखा गया। कतारों वाले रास्तों पर छांव के लिए टेंट और शेड लगाए गए थे। जगह-जगह ठंडे पानी के प्याऊ, ओआरएस घोल और चिकित्सा सहायता शिविर स्थापित किए गए थे ताकि किसी भी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर उसे तुरंत प्राथमिक उपचार दिया जा सके। भीड़ को व्यवस्थित टुकड़ों में मंदिर के भीतर भेजा जा रहा था, जिससे कहीं भी अफरा-तफरी की स्थिति पैदा नहीं हुई।
‘भीड़ अपार, फिर भी सुलभ हुए हनुमान’ – भक्तों ने साझा किया अपना अनुभव
हनुमानगढ़ी में दर्शन के लिए विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं के चेहरों पर एक अनोखा संतोष देखने को मिला। दर्शन करके बाहर आईं महिला श्रद्धालु अर्चना पाठक ने आईएएनएस से बातचीत में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि आज जेठ के पांचवें मंगलवार की वजह से हनुमानगढ़ी में अत्यधिक भीड़ है। देश और प्रदेश के कोने-कोने से लोग यहां पहुंचे हैं क्योंकि इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। लेकिन सबसे अच्छी बात यह रही कि इतनी भीड़ के बाद भी हमें बहुत ही सुगमता से दर्शन हो गए। जगह-जगह भंडारे चल रहे हैं और प्रशासन ने पानी व सुरक्षा की जो व्यवस्था की है, वह वाकई तारीफ के काबिल है।
इसी तरह गोरखपुर से बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने आए एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि भीड़ बहुत ज्यादा थी, मन में थोड़ा डर था कि दर्शन हो पाएंगे या नहीं। लेकिन पुलिस और सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार इतना सहयोगात्मक था कि लाइन लगातार चलती रही। हनुमान जी की कृपा से सब कुछ मंगलमय रहा। मंदिर के भीतर जो आध्यात्मिक आनंद और संतोष मिला, उसने रास्ते भर की पूरी थकान मिटा दी।
नवाबगंज से अयोध्या पहुंचे चंदन यादव ने भी व्यवस्थाओं को पूरे नंबर दिए। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी आकर दिल खुश हो गया। पुलिस प्रशासन के लोग बहुत ही व्यवस्थित तरीके से लाइनों को संभाल रहे हैं। किसी भी मोड़ पर कोई धक्का-मुक्की नहीं हुई और हम सबने बहुत शांति से भगवान के दर्शन किए। एक स्थानीय महिला श्रद्धालु ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहा है, जिससे अयोध्या आने वाले मेहमानों को कोई असउविधा नहीं हो रही है।
आस्था के इस महाकुंभ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अयोध्या न केवल भव्य राम मंदिर बल्कि हनुमान जी की भक्ति का भी सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र बन चुकी है। लाखों की भीड़ को बिना किसी अप्रिय घटना के बेहद गरिमापूर्ण और सुचारु रूप से दर्शन कराना नए दौर की वैश्विक अयोध्या के बेहतरीन क्राउड मैनेजमेंट की एक जीती-जागती मिसाल है। प्रशासन की इस संवेदनशीलता और दूरदर्शिता ने देश-दुनिया से आने वाले सनातन धर्मावलंबियों के मन में उत्तर प्रदेश की एक बेहद सुरक्षित, सुव्यवस्थित और संवेदनशील छवि अंकित की है।





















































