लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाइयों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने न केवल ईडी के कथित चयनात्मक रुख पर सवाल उठाए, बल्कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद को लेकर भी सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं और वास्तविक अपराधियों को नज़रअंदाज करते हुए निर्दोषों को परेशान किया जा रहा है।
ईडी की कार्रवाई पर अखिलेश का करारा व्यंग्य
सपा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखी पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा, “छापा मारना चाहिए कर्नाटक और महाराष्ट्र में, मार रहे हैं यूपी में। जहां ‘सीसी’ का माल है, वहां नहीं जाते हैं, बस दिखावटी औपचारिकता निभाते हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब ईडी ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए केंद्रीय एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह जताया।
उन्होंने आगे कहा कि ईडी को उन राज्यों में भी अपनी कार्रवाई तेज करनी चाहिए जहां भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, लेकिन एजेंसी उत्तर प्रदेश तक ही सीमित क्यों है। उनका यह बयान विपक्षी दलों द्वारा लंबे समय से उठाए जा रहे केंद्रीय एजेंसियों के ‘चयनात्मक’ रवैये के आरोपों को और मजबूत करता है।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: सरकार पर तीखा हमला
अखिलेश यादव ने अपनी बात रखते हुए अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे, दान और चंदे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर भी केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंदिर से चढ़ावे की चोरी की खबर ने पूरी दुनिया में सनातन समाज को आहत और शर्मसार किया है। इस घटना ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, बल्कि सरकार की साख को भी गहरा धक्का लगा है।
सपा प्रमुख ने कहा, “अयोध्या के मंदिर से ‘चढ़ावा, चंदा, दान चोरी’ का समाचार समस्त विश्व में फैल चुका है। दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाला सनातन समाज भाजपा और उसके सहयोगियों के कृत्यों से हो रही बदनामी के कारण शर्मसार है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकरण ने सरकार की धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक विश्वसनीयता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
निवेशकों का विश्वास खोने का आरोप
सबसे चौंकाने वाली बात जो अखिलेश यादव ने कही, वह निवेशकों से संबंधित है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद दुनिया भर के निवेशक भी अपने निवेश को लेकर सतर्क हो गए हैं और वे भारत से अपना हाथ खींच रहे हैं। उनका कहना था, “जिस सरकार ने अपने भगवान के दानपात्र तक को नहीं छोड़ा, वह कल हमारे निवेश को क्या छोड़ेगी।” यह एक गंभीर आरोप है जो सरकार की आर्थिक नीतियों और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि यह मामला केवल धार्मिक नहीं, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से विदेशी निवेशकों का विश्वास डगमगा जाता है जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक और बड़े फैसले
गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले के सामने आने के बाद सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक आयोजित की गई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे ट्रस्ट ने तुरंत स्वीकार कर लिया। ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय मामले की गंभीरता को देखते हुए लिया गया है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने जानकारी देते हुए बताया कि नए महामंत्री की नियुक्ति होने तक कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के प्रयासों को दर्शाता है। इसके अलावा, प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है, जो आगामी प्रक्रिया को अंजाम देगी।
22 जुलाई को होगी अगली बैठक
ट्रस्ट ने आगामी कार्ययोजना पर चर्चा करने और चढ़ावा प्रकरण से संबंधित अन्य पहलुओं पर विचार-विमर्श के लिए 22 जुलाई को अगली बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक में चढ़ावे की पारदर्शी व्यवस्था, दान की निगरानी और मंदिर के संचालन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों का मानना है कि यह बैठक राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में और अधिक सुधार के लिए अहम साबित हो सकती है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
अखिलेश यादव के इस बयान ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा सपा को भाजपा पर हमला बोलने का एक नया अवसर प्रदान कर सकता है। वहीं, भाजपा ने अभी तक इस मामले में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही इन आरोपों का जवाब देने के लिए अपनी रणनीति तैयार करेगी।





















































