उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन लाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने एक अहम और कड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में अब पुराने रजिस्टर सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने एक सख्त आदेश जारी करते हुए शिक्षकों, शिक्षणेतर (नॉन-टीचिंग) कर्मचारियों और यहां तक कि छात्र-छात्राओं की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस बड़े फैसले का जहां एक ओर स्वागत हो रहा है, वहीं मुस्लिम धर्मगुरुओं और उलेमाओं ने भी इसे मदरसों की बेहतरी के लिए एक सकारात्मक शुरुआत बताया है।
सभी जिलों में निर्देश जारी, अब ऐसे दर्ज होगी हाजिरी
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से प्रदेश के सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को इस संबंध में सख्त और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत, मदरसों के अंदर अब मैनुअल हाजिरी का चलन बंद हो जाएगा। हर दिन मदरसा खुलने और बंद होने के समय शिक्षकों, कर्मचारियों और सभी विद्यार्थियों को बायोमेट्रिक मशीन पर अपनी उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) लगाकर उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इस सिस्टम को सीधे सरकारी सर्वर से जोड़ा जाएगा, जिससे हाजिरी में किसी भी प्रकार की हेराफेरी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का समर्थन: “शिक्षा में आएगा सुधार”
मदरसा बोर्ड के इस बड़े फैसले पर इस्लामिक जगत से बेहद सकारात्मक और उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। लखनऊ स्थित इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और जाने-माने धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने राज्य सरकार की इस पहल का खुलकर स्वागत किया है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए मौलाना फरंगी महली ने कहा कि बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होना वक्त की मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया, “इस नई प्रणाली से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मदरसों में शिक्षकों की समय पर और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सकेगी। जब शिक्षक समय पर आएंगे, तो कक्षाएं भी नियमित रूप से चलेंगी, जिससे मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में एक नया अनुशासन देखने को मिलेगा।” उनका मानना है कि मदरसों में तालीम (शिक्षा) के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए उस्तादों (शिक्षकों) की पाबंदी बेहद जरूरी है।
जमीयत हिमायतुल इस्लाम: “राष्ट्र निर्माण में मददगार होगी पहल”
इस फैसले की सराहना करते हुए जमीयत हिमायतुल इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मदरसों का काम केवल मजहबी तालीम देना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि मुख्यधारा से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में भी उन्हें अपनी अहम भूमिका निभानी चाहिए।
मौलाना जमाल ने कहा, “अगर सरकार चाहती है कि मदरसे राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में अपना योगदान दें, तो यह एक बेहद शानदार कदम है।” उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस मशहूर बयान को भी याद किया जिसमें पीएम ने कहा था कि वह मुस्लिम युवाओं के ‘एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर (लैपटॉप)’ देखना चाहते हैं। मौलाना जमाल ने कहा कि इस आधुनिक सोच को धरातल पर उतारने का समय आ गया है। मदरसों में बच्चों के भीतर देशभक्ति का जज्बा पैदा होना चाहिए और उन्हें मुल्क के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया जाना चाहिए।
कैबिनेट मंत्री ओ.पी. राजभर ने बताई फैसले की असली वजह
आखिर सरकार को यह बायोमेट्रिक हाजिरी का फैसला क्यों लेना पड़ा? इस पर उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्थिति स्पष्ट की। राजभर ने बताया कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को लंबे समय से मदरसों की कार्यप्रणाली, शिक्षकों के नदारद रहने और हाजिरी रजिस्टर में गड़बड़ी को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
मंत्री राजभर ने कहा, “इन्हीं शिकायतों का संज्ञान लेते हुए और मदरसों में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य करने का कठोर निर्णय लिया गया है। विभाग की तरफ से इसके लिए सभी जरूरी आदेश निर्गत कर दिए गए हैं और इसे जल्द से जल्द पूरी सख्ती के साथ लागू कराया जाएगा।”
इस फैसले के बाद यह तय माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मदरसों की सूरत बदलने वाली है और वहां भी आधुनिक और पारदर्शी शिक्षा प्रणाली का दौर शुरू होने जा रहा है।





















































