उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब (वस्त्र उद्योग का केंद्र) बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम और तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वस्त्र क्षेत्र की बदलती जरूरतों और भविष्य की अपार संभावनाओं को देखते हुए एक व्यापक और आधुनिक कौशल विकास कार्ययोजना (Skill Development Plan) तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि युवाओं को दिया जाने वाला प्रशिक्षण केवल सर्टिफिकेट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सीधे तौर पर उनकी आजीविका और रोजगार की गारंटी बनना चाहिए।
निवेश और रोजगार का प्रमुख केंद्र बन रहा उत्तर प्रदेश
सोमवार को जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से वस्त्र और परिधान (Textile and Apparel) के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। आज राज्य में इस सेक्टर में भारी निवेश आ रहा है, जिससे उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। इस बढ़ती औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए यह नितांत आवश्यक है कि टेक्सटाइल कंपनियों और कारखानों को समय पर उच्च प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन (Skilled Manpower) उपलब्ध कराया जा सके।
‘समर्थ योजना’ की अभूतपूर्व सफलता: 87% महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
वस्त्र उद्योग में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बनकर उभरी है। हालिया बैठक में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘समर्थ योजना’ के तहत अब तक 2 लाख 28 हजार से अधिक युवाओं को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से 1 लाख 60 हजार से अधिक प्रशिक्षार्थियों को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ा गया है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह योजना मील का पत्थर साबित हो रही है, क्योंकि कुल प्रशिक्षित युवाओं में 87 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी महिलाओं की है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन भी लगातार युवाओं को टेक्सटाइल से जुड़े विभिन्न आधुनिक ट्रेडों में ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन दे रहा है।
आधुनिक तकनीक और ‘टेक्निकल टेक्सटाइल्स’ पर विशेष फोकस
वस्त्र क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का समय स्वचालन (Automation) और आधुनिक मशीनरी का है। पूरी दुनिया में ‘टेक्निकल टेक्सटाइल्स’ जैसे नए और उन्नत क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में हमारे पुराने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी समय के अनुरूप अपडेट किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि बाजार और उद्योगों की वास्तविक और मौजूदा जरूरतों का गहराई से आकलन किया जाए, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सिर्फ किताबी न रखकर पूरी तरह से इंडस्ट्री-रेडी और रोजगारपरक बनाया जा सके।
ग्रामोद्योग और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की दरकार
इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रस्तावित नई कौशल विकास व्यवस्था का पूरा ब्लू-प्रिंट भी मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया। इस रूपरेखा में मुख्य रूप से उद्योगों, सरकारी विभागों और तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों के बीच तालमेल बिठाने पर जोर दिया गया है। सरकार की कोशिश है कि ग्रामोद्योग के स्तर पर भी रोजगार की संभावनाओं को नई गति दी जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और स्थानीय स्तर पर ही युवाओं को बेहतर रोजगार के साधन मिल सकें।





















































