उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए एक बेहद अनूठा और प्रेरणादायी विजन सामने रखा। उन्होंने कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के बीच ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को एक मुकदमे और न्यायिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया। मुख्यमंत्री के इस अनूठे संबोधन ने समारोह में मौजूद सभी युवा अधिवक्ताओं और विद्वानों का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने आधुनिक युग की चुनौतियों, तकनीक के इस्तेमाल और न्याय व्यवस्था की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की।
विकसित भारत: 140 करोड़ देशवासियों का सबसे बड़ा ‘केस’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को एक कानूनी केस के रूप में पेश किया। उन्होंने युवा छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि हम इस परिकल्पना को ‘केस नंबर 2047’ मान लें, तो इसके मुख्य याची देश के 140 करोड़ नागरिक हैं। इस ऐतिहासिक मुकदमे में इन याचियों के अधिवक्ता के रूप में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वाद का प्रतिवादी कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि वे लोग हैं जो यथास्थितिवादी (रूढ़िवादी) सोच रखते हैं। जो लोग यह मानकर बैठ चुके हैं कि देश में कभी बड़ा बदलाव नहीं आ सकता, जो किसी भी प्रगतिशील तर्क या साक्ष्य को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, हमारा मुकाबला उन्हीं से है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि इस जिद्दी प्रतिवादी के खिलाफ उन्हें तथ्यों, ठोस साक्ष्यों और पूरी ईमानदारी के साथ अपनी दलीलें रखनी होंगी, तभी देश को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।
आर्थिक लक्ष्य और आधुनिक तकनीक की चुनौतियां
देश और प्रदेश के आर्थिक विकास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का ठोस रोडमैप तैयार कर लिया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवा कानूनविदों और मेधावियों का योगदान बेहद अहम होगा। बदलते दौर और तकनीक पर बात करते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक और साइबर अपराधों से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सीएम योगी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता बेशक काम को आसान बना सकती है, लेकिन न्याय और अंतिम निर्णय हमेशा मानवीय विवेक से ही होने चाहिए। कानूनी दस्तावेजों का लापरवाह मसौदा तैयार करने से किसी निर्दोष व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता से हाथ धोना पड़ सकता है। साइबर सुरक्षा की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थानों और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क की स्थापना की जा चुकी है। इसके साथ ही ‘एआई प्रज्ञा’ पहल के माध्यम से राज्य के 10 लाख युवाओं को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
युवा वकीलों के लिए जीवन के मूल्य और दीक्षांत की उपलब्धियां
कानून के नए स्नातकों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें अन्याय के खिलाफ निडर होकर खड़े होने, अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और जीवनभर निरंतर अध्ययन करते रहने की सलाह दी। उन्होंने सुझाव दिया कि युवा अधिवक्ताओं को गांवों में जाकर भूमि और पारिवारिक विवादों के समाधान में अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी चेताया कि यदि कभी गलत कार्य करने का कोई दबाव आए, तो अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से कभी समझौता न करें। दीक्षांत समारोह के दौरान मेधावी छात्रों की उपलब्धियों को भी सम्मानित किया गया। एलएलएम पाठ्यक्रम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण पदक, चित्रा सिंह को रजत पदक और सौम्या गिरी को कांस्य पदक प्रदान किया गया। वहीं, एलएलबी ऑनर्स में तेजस्विनी कौशल ने स्वर्ण पदक, ईशा अग्रवाल ने रजत पदक और निशा वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया। विशेष रूप से ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ के लिए ‘जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल मेडल’, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ के लिए ‘पद्मावती मोहनलाल जरीवाला मेडल’ और ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के प्रतिष्ठित ‘वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक’ से सम्मानित किया गया।



















































