उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना सामने आई, जहां एक अनियंत्रित रसोई गैस सिलेंडर लदे ट्रक ने बाइक सवार परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण टक्कर में 27 वर्षीय महिला और उसकी गोद में मौजूद महज आठ दिन के नवजात शिशु की घटनास्थल पर ही कुचलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि बाइक चला रहा पति छिटककर दूर गिरने से बाल-बाल बच गया। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया और आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर घंटों मार्ग जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया।
क्लीनिक से पीलिया की दवा लेकर घर लौट रहा था परिवार
पुलिस द्वारा साझा की गई प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इंचौली थाना अंतर्गत महल गांव के निवासी संजय अपने आठ दिन के नवजात बेटे का उपचार कराने गए थे। मासूम को पीलिया की शिकायत थी, जिसके चलते संजय अपनी 27 वर्षीया पत्नी प्रिया और बच्चे को साथ लेकर एक चिकित्सक के क्लीनिक पहुंचे थे। दवाई लेने के उपरांत दंपती बाइक से वापस अपने गांव लौट रहे थे। जैसे ही उनकी दोपहिया दौराला-मसूरी मुख्य मार्ग पर स्थित काली माता मंदिर के पास पहुंची, सामने से आ रहे एलपीजी सिलेंडरों से भरे भारी ट्रक ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।
पहिए के नीचे आने से मां-बेटे की थमी सांसें, पिता की बची जान
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि संतुलन बिगड़ने के कारण प्रिया अपने आठ दिन के कलेजे के टुकड़े के साथ सीधे ट्रक के भारी पहियों के नीचे आ गिरी, जिससे दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, दूसरी दिशा में सड़क किनारे गिरने की वजह से संजय इस खौफनाक हादसे में सुरक्षित बच गए, हालांकि आंखों के सामने पत्नी और नवजात को खोने के सदमे से वह सुधबुध खो बैठे। हादसे को अंजाम देकर भागने का प्रयास कर रहे ट्रक चालक को राहगीरों और ग्रामीणों ने दौड़ाकर धर दबोचा और उसकी जमकर धुनाई कर दी। सूचना मिलते ही इंचौली थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी चालक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर हिरासत में ले लिया।
सड़क पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, एंबुलेंस के शीशे तोड़े
मासूम और उसकी मां की असमय मौत से उग्र हुए ग्रामीणों और परिजनों ने शवों को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। आक्रोशित भीड़ ने प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस दौरान वहां पहुंची एक एंबुलेंस पर पथराव कर उसके शीशे चकनाचूर कर दिए। प्रदर्शनकारी पीड़ित परिवार के लिए तत्काल सरकारी आर्थिक सहायता और परिवार के एक आश्रित सदस्य को स्थायी नौकरी दिए जाने की मांग पर अड़ गए, जिससे मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
नेताओं के हस्तक्षेप के बाद खुला मार्ग, शव पोस्टमार्टम को भेजे गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक संगीत सोम तथा समाजवादी पार्टी के सरधना विधायक अतुल प्रधान मौके पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने शोकाकुल परिजनों और आक्रोशित ग्रामीणों से लंबी बातचीत की। पूर्व विधायक ने शासन स्तर से समुचित मुआवजा दिलवाने के साथ परिवार के एक सदस्य को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। जनप्रतिनिधियों के समझाने-बुझाने के बाद जाम समाप्त हुआ। हालांकि, जब पुलिस शवों को पोस्टमार्टम हाउस ले जाने लगी, तो कुछ महिलाओं और युवकों ने पुलिस की गाड़ी के आगे लेटकर पुन: विरोध दर्ज कराया। इंचौली थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए बताया कि आरोपी चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है, दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है और क्षेत्र में यातायात पूरी तरह सुचारू कर दिया गया है।




















































