मेरठ उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित सनसनीखेज ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोनों मुख्य दोषियों को मृत्युदंड की सजा दी है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने पति की नृशंस हत्या कर शव के टुकड़े-टुकड़े करने और उसे नीले ड्रम में सीमेंट से सील करने के बेहद संगीन मामले में मृतक सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी के फंदे पर लटकाने का आदेश जारी किया। अदालत ने इस बर्बर कृत्य को जघन्यतम अपराध की श्रेणी में रखते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कानून का कड़ा रुख ही समाज में न्याय का भरोसा कायम रख सकता है।
अदालत का कड़ा रुख: जघन्य अपराध पर नजीर बनेगी सजा
जिला न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने अभियोजन पक्ष के मजबूत साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर मुस्कान और साहिल को हत्या तथा साक्ष्य नष्ट करने की धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा-ए-मौत मुकर्रर की। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) के.के. चौबे के अनुसार, अदालत ने 19 सितंबर को ही इस मामले में दोषसिद्धि का निर्णय सुरक्षित रख लिया था। अंतिम फैसला सुनाते समय पीठ ने उच्चतम न्यायालय की नजीरों का उल्लेख करते हुए रेखांकित किया कि समाज को दहला देने वाले इस प्रकार के जघन्य कृत्यों में दोषियों को कठोरतम दंड देना अनिवार्य है, ताकि समाज में असामाजिक तत्वों को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया जा सके।
फैसले के वक्त खामोश रहे मुजरिम, कोर्ट रूम में मौजूद था पीड़ित परिवार
अदालत में जब फैसले की घोषणा हुई, उस समय मृतक सौरभ राजपूत की मां, भाई तथा अन्य परिजन न्यायालय कक्ष में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। वहीं सुरक्षा कारणों के चलते दोनों दोषियों, मुस्कान और साहिल, की पेशी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई। अधिवक्ता चौबे ने बताया कि सजा के मुहाने पर खड़े दोनों दोषियों की मनोदशा में हाल के दिनों में भारी बदलाव दर्ज किया गया था। सजा के ऐलान से पूर्व साहिल कई दिनों तक पूरी तरह गुमसुम और चुपचाप रहा, जबकि मुस्कान और साहिल दोनों ही पिछले कुछ दिनों से अपना अधिकांश समय ईश्वर की प्रार्थना में बिता रहे थे।
13 महीने में 126 सुनवाई और 22 गवाहों की गवाही
न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ ठोस कानूनी घेराबंदी की। मामले को साबित करने के लिए अदालत के पटल पर कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। करीब 13 महीनों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और 126 सुनवाइयों के विस्तृत दौर के बाद अदालत ने दोनों को हत्या तथा अपराध के साक्ष्य छिपाने की धाराओं के तहत दोषी माना। दोनों पक्षों की जिरह और डिजिटल तथा फॉरेंसिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के उपरांत अदालत ने इसे दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध स्वीकार किया।
बेहोश कर चाकुओं से गोदा, फिर नीले ड्रम में सीमेंट भरकर सील किया शव
मामले के विवरण के अनुसार, यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 की रात को ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में अंजाम दी गई थी। जांच में सामने आया कि मुस्कान ने पहले नशीला पदार्थ देकर अपने पति सौरभ को पूरी तरह बेसुध कर दिया। इसके बाद उसने अपने प्रेमी साहिल को बुलाकर सौरभ पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए और उसकी जान ले ली। हैवानियत यहीं नहीं थमी; दोनों ने शव की पहचान मिटाने के लिए उसके कई टुकड़े किए, उन्हें एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में भरा और फिर बदबू तथा सुराग छिपाने के लिए ड्रम को सीमेंट के घोल से पूरी तरह सील कर दिया।
फरारी, गिरफ्तारी और जनाक्रोश का सामना
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी पुलिस से बचने के लिए सीधे हिमाचल प्रदेश फरार हो गए थे। हालांकि, पुलिस टीम ने सुराग जुटाते हुए 18-19 मार्च 2025 को दोनों को दबोच लिया था। इस खौफनाक हत्याकांड के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भारी जनआक्रोश देखा गया था। पूर्व में जब दोनों को न्यायिक रिमांड के लिए कचहरी लाया गया था, तब वकीलों और आम लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था और साहिल की पिटाई तक हो गई थी। अब अदालत के इस कड़े फैसले से पीड़ित परिवार ने न्याय की उम्मीद पूरी होने पर राहत की सांस ली है।

















































