लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति के तहत विजिलेंस विभाग ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर मामले में घिरे परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आलीशान आवास पर विजिलेंस की टीम ने छापेमारी की। लगभग 26 घंटे तक अनवरत चली इस मैराथन तलाशी में जांच अधिकारी भी उस वक्त सन्न रह गए जब घर के कोने-कोने और दीवारों से भारी मात्रा में सोना, चांदी, बेशकीमती हीरे के जेवरात और करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने लगी।
कुबेर का खजाना: दीवारों और पैकेटों में छिपाकर रखे थे करोड़ों रुपये
विजिलेंस टीम द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अलीगंज की चंद्रलोक कॉलोनी स्थित ललित कुमार के बंगले से लगभग 13 किलोग्राम शुद्ध सोना, 9 किलोग्राम चांदी और अत्यधिक मात्रा में हीरे के आभूषण जब्त किए गए हैं। सर्राफा बाजार के मौजूदा भाव के अनुसार इस बरामद सोने-चांदी और हीरों की अनुमानित कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
इसके अतिरिक्त, जांच टीम ने घर की सघन तलाशी के दौरान 1.62 करोड़ रुपये की अवैध नकदी भी बरामद की है। भ्रष्टाचार की इस काली कमाई को बेहद शातिर तरीके से कमरों की दीवारों के खोखले हिस्सों, गुप्त पैकेटों और घर के अलग-अलग गुप्त कोनों में छिपाकर रखा गया था, जिसे गिनने के लिए बकायदा मशीनों की मदद लेनी पड़ी।
जमीनों और आलीशान फ्लैटों के दस्तावेज बरामद, कुल संपत्ति 35 करोड़ पार
गहनों और नकदी के अलावा विजिलेंस के हाथ कई ऐसे दस्तावेज भी लगे हैं जो पूर्व अधिकारी के बड़े रियल एस्टेट नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। तलाशी के दौरान विभिन्न शहरों में स्थित 15 आलीशान मकानों, फ्लैटों और बेशकीमती कृषि भूमियों (जमीनों) से जुड़े मालिकाना हक के कागजात मिले हैं। विजिलेंस के प्रारंभिक मूल्यांकन के अनुसार, अब तक बरामद की जा चुकी इस पूरी चल और अचल संपत्ति की कुल सामूहिक बाजार कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है।
कानपुर पोस्टिंग के दौरान शुरू हुई थी जांच की पटकथा
इस बड़ी कार्रवाई की नींव तब पड़ी थी जब ललित कुमार कानपुर में परिवहन विभाग के भीतर संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) के पद पर तैनात थे। उस दौरान उनके खिलाफ पद के दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर अवैध उगाही करने की गोपनीय शिकायतें शासन को प्राप्त हुई थीं। इन गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेते हुए परिवहन आयुक्त ने मामले की विजिलेंस जांच कराने की संस्तुति प्रदान की। इसके बाद जांच एजेंसी ने ललित कुमार की सेवा अवधि के दौरान हुए कुल खर्चों और उनके वैध आय के स्रोतों का गहराई से मिलान और भौतिक सत्यापन करना शुरू किया।
वैध आय से 73.6% अधिक मिला खर्च, नहीं दे पाए कोई जवाब
विजिलेंस की वित्तीय जांच में जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। आधिकारिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, ललित कुमार की पूरी सेवा अवधि के दौरान उनकी कुल वैध और ज्ञात स्रोतों से होने वाली आय करीब 93.26 लाख रुपये दर्ज की गई थी। इसके विपरीत, उनके द्वारा विभिन्न चल-अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त, आलीशान जीवनशैली और अन्य मदों में किया गया कुल खर्च लगभग 1.61 करोड़ रुपये पाया गया।
यह उनकी वास्तविक और कानूनी आय की तुलना में तकरीबन 73.6 प्रतिशत अधिक था। जब जांच एजेंसी ने ललित कुमार से इस अतिरिक्त आय और भारी-भरकम खर्चों के विधिक स्रोतों के संबंध में पूछताछ की, तो वे इसके समर्थन में कोई भी संतोषजनक या वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहे।
अदालत के सर्च वारंट पर अलीगंज में पड़ा छापा
आगरा से एआरटीओ के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद ललित कुमार लखनऊ के पॉश इलाके अलीगंज की चंद्रलोक कॉलोनी में अपनी आलीशान जिंदगी बसर कर रहे थे। पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद विजिलेंस की विशेष अदालत से बकायदा तलाशी वारंट (सर्च वारंट) हासिल किया गया और फिर पूरी रणनीति के साथ उनके आवास पर धावा बोला गया। फिलहाल, विजिलेंस विभाग भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत इस पूरे मामले में आगे की कठोर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है।





















































