नोएडा: दिल्ली-एनसीआर में दोपहिया वाहनों की चोरी करने वाले गिरोहों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में नोएडा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना सेक्टर-49 की पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक सक्रिय अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी निशानदेही पर विभिन्न इलाकों से चुराई गई कुल 10 मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। पकड़े गए आरोपी लंबे समय से हाईटेक सिटी और आसपास के रिहायशी इलाकों में सक्रिय थे, जिससे वाहन स्वामियों में दहशत का माहौल बना हुआ था।
खुफिया तंत्र और बीट पुलिसिंग से सेक्टर-50 के पास मिली सफलता
पुलिस से प्राप्त विवरण के अनुसार, 7 जुलाई को सेक्टर-49 थाने की पुलिस टीम को अपने स्थानीय खुफिया नेटवर्क और बीट पुलिसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण इनपुट मिला था। इस गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस ने फौरी कार्रवाई करते हुए नोएडा के सेक्टर-50 स्थित बिजली घर के समीप घेराबंदी की। पुलिस की इस मुस्तैद घेराबंदी के चलते मौके से दो संदिग्धों को धर दबोचा गया।
जब इन दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई और उनकी निशानदेही पर छापेमारी की गई, तो पुलिस के हाथ एक के बाद एक कुल 10 चोरी की मोटरसाइकिलें लगीं। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान 23 वर्षीय बलिन्दर (पुत्र संतकुमार) और 19 वर्षीय विवेक (पुत्र संजय) के रूप में हुई है।
5 जुलाई की एक शिकायत से खुला चोरों का पूरा नेटवर्क
इस पूरे मामले का पटाक्षेप 5 जुलाई को दर्ज हुई एक चोरी की वारदात से हुआ। दरअसल, एक पीड़ित व्यक्ति ने थाना सेक्टर-49 में शिकायत दर्ज कराई थी कि सेक्टर-50 क्षेत्र से उसकी मोटरसाइकिल चोरी हो गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया और चोरों की धरपकड़ के लिए एक विशेष टीम का गठन किया।
जांच अधिकारी ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया, जिसके बाद कड़ियों से कड़ियां जुड़ती गईं और पुलिस सीधे आरोपियों तक पहुंच गई। प्रारंभिक छानबीन में यह बात भी सामने आई है कि जब्त की गई मोटरसाइकिलों में से कई गाड़ियां नोएडा के ही अलग-अलग थाना क्षेत्रों से उड़ाई गई थीं, जिनके संबंध में पहले से ही संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज हैं।
रेकी करने का तरीका: सुनसान पार्किंग को बनाते थे निशाना
पुलिस की गिरफ्त में आए दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपने गुनाह कबूल करते हुए वाहन चोरी के तौर-तरीकों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वे सबसे पहले नोएडा और एनसीआर के व्यस्त बाजारों, मेट्रो स्टेशनों के पास की अनधिकृत पार्किंग और सुनसान रास्तों की रेकी करते थे। जैसे ही उन्हें कोई ऐसा वाहन दिखता था जिस पर स्वामी की नजर नहीं है, वे मास्टर चाबी की मदद से चंद सेकंड में लॉक तोड़कर गाड़ी लेकर फरार हो जाते थे।
चोरी करने के बाद इन वाहनों को कुछ दिनों के लिए एक सुरक्षित और गुप्त ठिकाने पर छुपा दिया जाता था। इसके बाद, आरोपी सीधे-साधे राहगीरों और जरूरतमंद लोगों को झांसे में लेते थे और बिना किसी वैध कागजात के बेहद सस्ते दामों पर इन मोटरसाइकिलों को बेचकर रफूचक्कर हो जाते थे। पुलिस अब इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि इन चोरी की गाड़ियों को खरीदने वाले लोग कौन थे और क्या उनका भी इस नेटवर्क में कोई हाथ है।
आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास और पुलिस की आगामी कार्रवाई
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पृष्ठभूमि की जांच करने पर पता चला कि दोनों ही आदतन अपराधी हैं। आरोपी बलिन्दर मूल रूप से बिहार के कटिहार जिले के गोपालगंज गांव का निवासी है, जो वर्तमान में नोएडा के थाना सेक्टर-49 क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम होशियारपुर में छिपकर रह रहा था। बलिन्दर के खिलाफ इससे पहले भी थाना सेक्टर-39 में आबकारी अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज हो चुका है।
वहीं, दूसरा आरोपी विवेक ग्राम होशियारपुर (सेक्टर-51, नोएडा) का स्थाई निवासी है, जिसके खिलाफ पूर्व में थाना सेक्टर-24 में आर्म्स एक्ट (आयुध अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जा चुकी है।
वर्तमान मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। नोएडा पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि बरामद की गई मोटरसाइकिलों के चेसिस और इंजन नंबर के जरिए उनके वास्तविक स्वामियों की पहचान की जा रही है ताकि कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर वाहन उन्हें सौंपे जा सकें। साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश में पुलिस की छापेमारी जारी है।





















































