लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय कुप्रबंधन को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कटघरे में खड़ा किया है। लखनऊ में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए सपा प्रमुख ने मांग की है कि राम मंदिर परिसर के भीतर कार्यरत और प्रबंधन से जुड़े सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की गहन तकनीकी जांच कराई जाए। अखिलेश यादव ने दावा किया कि यदि निष्पक्षता से यह जांच हो गई, तो मंदिर प्रबंधन के नाम पर गड़बड़ी करने वाले 99.9 प्रतिशत लोगों का सीधा कनेक्शन सत्ताधारी दल भाजपा से उजागर हो जाएगा।
जांच हुई तो भाजपा में मच जाएगी भगदड़, कई नेता सपा के संपर्क में
सपा प्रमुख ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अब केवल प्रशासनिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश और देश के हर आम नागरिक के घर में चर्चा का मुख्य विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए विशेष अन्वेषण दल (SIT) का गठन तो किया गया है, लेकिन जब तक मंदिर से जुड़े लोगों की सीडीआर खंगाली नहीं जाएगी, तब तक असली गुनहगार सामने नहीं आएंगे। अखिलेश यादव ने राजनीतिक भविष्यवाणी करते हुए कहा कि जैसे ही यह डेटा सार्वजनिक होगा, आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि भाजपा के भीतर कैसी ऐतिहासिक भगदड़ मचेगी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बदनामी के डर से भाजपा के कई बड़े नेताओं में पार्टी छोड़ने की होड़ लग चुकी है और उनमें से तमाम लोग समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लगातार संपर्क साध रहे हैं।
जिम्मेदारी सौंपने वाले बड़े नेता आखिर पर्दे के पीछे क्यों छिपे हैं?
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर वैचारिक सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए चुनावी लाभ और मतों का ध्रुवीकरण सबसे ऊपर है, जिसके लिए वह अपनी मूल विचारधारा को भी सहूलियत के हिसाब से बदलने में संकोच नहीं करती। उनके लिए धर्म और आस्था से बड़ा माध्यम पैसा और सत्ता बन चुकी है।
अयोध्या के वर्तमान हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए अखिलेश यादव ने पूछा कि आखिर वे बड़े चेहरे कहां गायब हैं जिन्होंने इन विवादित लोगों को इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी थीं? आज स्थिति यह है कि जिन लोगों को काम दिया गया था, वे चौतरफा सवालों और कानूनी जांच का सामना कर रहे हैं, जबकि पर्दे के पीछे से पूरी बिसात बिछाने वाले मुख्य योजनाकार पूरी तरह से दृश्य से गायब नजर आ रहे हैं।
भक्तों के चढ़ावे को चुराना सबसे बड़ा पाप, आहत हुआ सनातन समाज
राम मंदिर के पवित्र चढ़ावे में धांधली के आरोपों को महापाप की संज्ञा देते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने कहा कि इस शर्मनाक घटनाक्रम से देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर फैले सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायी और रामभक्त गहरे मानसिक आघात में हैं। पूरा सनातनी समाज इस कृत्य से बेहद चिंतित और आक्रोशित है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम को हम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजते हैं, जिन्होंने जीवन भर आदर्शों और स्थापित मर्यादाओं को सर्वोपरि रखा, लेकिन भाजपा ने अपने तात्कालिक राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए उन पावन आदर्शों को पूरी तरह से तोड़-मरोड़ कर रख दिया है। सनातन परंपरा में भगवान के चरणों में अर्पित किए गए दान की चोरी से बड़ा और जघन्य कोई पाप नहीं हो सकता। भाजपा समर्थित लोगों ने आस्था के साथ खिलवाड़ कर यह बहुत बड़ा पाप किया है, क्योंकि सनातन समाज अपनी धार्मिक भावनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील और भावुक होता है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के आरोपों पर पलटवार, FIR न होने पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने इस दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सोशल मीडिया पर उन पर लगाए गए मनगढ़ंत आरोपों का भी करारा जवाब दिया। बता दें कि निशिकांत दुबे ने एक पोस्ट के जरिए दावा किया था कि चढ़ावे की चोरी के मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव के साथ अखिलेश यादव के करीबी संबंध हैं। इस पर पलटवार करते हुए सपा प्रमुख ने सत्ता के दोहरे मापदंडों को उजागर किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब विपक्ष के किसी नेता पर मामूली आरोप भी लगते हैं, तो तुरंत पुलिसिया कार्रवाई शुरू हो जाती है, लेकिन गंभीर साक्ष्यों के बाद भी सत्ताधारी दल के सांसद के खिलाफ अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) क्यों दर्ज नहीं की गई? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल एकतरफा कार्रवाई कर रही है, जहां विपक्ष को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है और अपने दागी नेताओं को सरकारी संरक्षण दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में अखिलेश यादव ने हाल ही में जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज से हुई अपनी शिष्टाचार मुलाकात का भी जिक्र किया और बताया कि पूज्य धर्मगुरु ने देश में गौवंश की दुर्दशा और उनकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है, जो कि हर सनातनी के लिए एक गंभीर विषय है।





















































