उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि या पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश के अग्रणी डिजिटल और सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के तकनीकी कायाकल्प, रिकॉर्ड निवेश और रोजगार सृजन की नई लहर का ब्योरा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश ने दशकों पुरानी पहचान को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक तकनीक के मोर्चे पर अभूतपूर्व छलांग लगाई है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के चलते राज्य की असीम क्षमताओं को दबाकर इसे ‘बीमारू’ दर्जे में बांधे रखा, जबकि वर्तमान डबल इंजन प्रशासन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को जमीनी धरातल पर क्रियान्वित किया है।
मोबाइल क्रांति से सेमीकंडक्टर हब की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आंकड़े प्रस्तुत करते हुए रेखांकित किया कि आज भारत के डिजिटल विनिर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका केंद्रीय हो चुकी है। देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोनों में से लगभग 60 फीसदी का उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में हो रहा है। इसके साथ ही, 55 फीसदी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का निर्माण भी राज्य की उत्पादन इकाइयों में दर्ज किया जा रहा है।
विनिर्माण क्षेत्र का यह विस्तार अब केवल असेंबलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश उच्च तकनीक के क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। जेवर में 3,706 करोड़ रुपये के भारी निवेश के साथ एचसीएल-फॉक्सकॉन की संयुक्त चिप निर्माण इकाई की स्थापना इस बदलाव का बड़ा प्रमाण है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य का तकनीकी सफर अब सीधे ‘मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप’ के उन्नत दौर में प्रवेश कर चुका है।
2017 से पहले की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार
वर्ष 2017 से पूर्व के प्रशासनिक परिदृश्य की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में योजनाएं केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित रहती थीं और परियोजनाएं अमल में आने से पहले ही दम तोड़ देती थीं।
उस दौर में समूचे विकास का केंद्र बिंदु केवल एक परिवार का उत्थान था, सैफई महोत्सव को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना गया और उद्योगों को बढ़ावा देने की बजाय संगठित माफिया तंत्र को संरक्षण दिया गया। जब व्यवस्था की चिंता आम जनता और औद्योगिक प्रगति के बजाय परिवार और अपराधियों की सुरक्षा पर केंद्रित हो, तब आधुनिक तकनीक और सुरक्षित निवेश का माहौल तैयार होना असंभव था।
प्राथमिकताओं में ऐतिहासिक बदलाव: माफियाराज का अंत और टेक्नोलॉजी को वरीयता
सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 के बाद शासन की प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदला गया। सत्ता का ध्यान परिवार के लाभ से हटाकर 25 करोड़ नागरिकों के समग्र विकास पर केंद्रित किया गया। निवेशकों को भयभीत करने वाले माफिया सिंडिकेट के संरक्षण की जगह निवेशकों की पूंजी और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, और राजनीतिक तुष्टीकरण के स्थान पर नवाचार व तकनीक को विकास का आधार बनाया गया। इसी पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण का परिणाम है कि आज बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उद्योग समूह राज्य में पूंजी निवेश के लिए उत्सुक हैं।
डेटा सेंटर से आगे: देश की पहली एआई सिटी का खाका
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के तेज विस्तार के कारण डेटा प्रबंधन की आवश्यकताओं में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश ने इस मांग को अवसर में बदलते हुए अब तक 644 मेगावाट क्षमता के अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव औपचारिक रूप से हासिल कर लिए हैं। डेटा के भारी उपयोग और तकनीकी प्रगति को नई दिशा देने के लिए प्रदेश अब केवल डेटा स्टोरेज तक नहीं रुक रहा, बल्कि उससे आगे बढ़ते हुए एआई सिटी (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी) की स्थापना की ओर कदम बढ़ा रहा है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम और 10 लाख युवाओं के कौशल का संकल्प
तकनीकी क्रांति को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उद्यमिता का एक विशाल तंत्र तैयार हो चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 24 हजार से अधिक सक्रिय स्टार्टअप काम कर रहे हैं और राज्य ने आठ यूनिकॉर्न कंपनियों को तैयार कर अपनी क्षमता साबित की है। यह मजबूत तंत्र युवाओं को सिर्फ नौकरी की तलाश करने वाले के बजाय रोजगार प्रदाता बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके अतिरिक्त, ‘एआई-प्रज्ञा’ पहल के अंतर्गत 10 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित भविष्य की उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है, ताकि डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए कुशल कार्यबल हमेशा उपलब्ध रहे।
एचसीएल टेक के 10 वर्ष और नए स्किलिंग सेंटर का शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी केवल बाहरी तकनीक का उपभोक्ता बाजार हुआ करता था, लेकिन आज यह स्वयं उच्च तकनीक का प्राथमिक निर्माता बन चुका है। ‘असेंबली से एआई’ तक का यह सफर केवल हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर की प्रगति नहीं, बल्कि राज्य के युवाओं की आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मार्ग है। इसी कड़ी में लखनऊ में एचसीएल टेक की सफल स्थापना के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सहभागिता करेंगे। इस अवसर पर तकनीकी दक्षता को गति देने के लिए ‘एचसीएल-जीयूवीआई इमर्जिंग टेक स्किलिंग सेंटर’ का औपचारिक शुभारंभ भी किया जाएगा, जो राज्य के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगा।





















































