गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके से एक भीषण दुर्घटना की खबर सामने आई है, जहां रामलीला मैदान परिसर स्थित सामुदायिक केंद्र में सोमवार सुबह रावण का पुतला बनाते समय अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इमारत की दो मजबूत दीवारें भरभराकर गिर गईं और मौके पर मौजूद पांच कारीगर व श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और दहशत का माहौल बन गया। आनन-फानन में राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए सभी झुलसे हुए लोगों को उपचार के लिए भेजा गया, जहां से उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए दिल्ली के जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
आग की सूचना पर दौड़ीं दमकल गाड़ियां, मौके पर दिखा अलग नजारा
घटना सोमवार 5 अक्टूबर 2026 की सुबह लगभग 9:26 बजे की है। साहिबाबाद अग्निशमन केंद्र के कंट्रोल रूम को प्रारंभिक जानकारी मिली कि शनि चौक स्थित रामलीला मैदान के पास पटाखों की एक दुकान में भीषण आग लग गई है। परिस्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मुख्य अग्निशमन अधिकारी (गाजियाबाद) और प्रभारी अग्निशमन अधिकारी (साहिबाबाद) के नेतृत्व में तुरंत तीन दमकल वाहन घटनास्थल की ओर रवाना किए गए। हालांकि, मौके पर पहुंचने पर टीम ने पाया कि आग किसी दुकान में नहीं, बल्कि रामलीला मैदान के ठीक पीछे बने सामुदायिक केंद्र भवन के एक बड़े हॉल में भड़की थी। दमकलकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पानी की तेज बौछारें कर कुछ ही देर में लपटों को पूरी तरह शांत कर दिया।
पुतले में आतिशबाजी भरने के दौरान विस्फोट की आशंका
आग बुझाने के बाद जब दमकल विभाग की तकनीकी टीम ने क्षतिग्रस्त हॉल का सघन मुआयना किया, तब घटना की असल वजह सामने आई। हॉल के भीतर आगामी दशहरे के अवसर पर होने वाले दहन के लिए रावण का विशालकाय पुतला तैयार किया जा रहा था। प्रारंभिक पड़ताल के अनुसार, कारीगर पुतले के अंदर आतिशबाजी अथवा बारूदी सामग्री फिट कर रहे थे। उसी दौरान किसी चिंगारी या घर्षण की वजह से विस्फोटकों ने अचानक आग पकड़ ली और एक भयानक धमाका हो गया। विस्फोट का झटका इतना जोरदार था कि हॉल की दो दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं।
घायलों में ऋषभ और हरेंद्र की पहचान, जीटीबी अस्पताल में इलाज जारी
इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में कुल पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों की मदद से सभी को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। दमकल विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा हेतु उन्हें दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल स्थानांतरित कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, पीड़ितों में से दो की पहचान ऋषभ और हरेंद्र के तौर पर हुई है, जबकि बाकी तीन अन्य घायलों के नाम और पते की आधिकारिक पुष्टि की जा रही है।
सुरक्षा मानकों और विस्फोटकों के इस्तेमाल की हो रही जांच
अग्निशमन विभाग और स्थानीय पुलिस अब इस पूरे मामले की गहन पड़ताल में जुट गई है। जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि घनी आबादी वाले इलाके में स्थित सामुदायिक भवन के भीतर रावण का पुतला बनाते समय किस प्रकार की बारूदी सामग्री का प्रयोग किया जा रहा था। क्या आयोजकों या कारीगरों के पास इन ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण और उपयोग की वैध अनुमति थी, तथा कार्यस्थल पर आवश्यक अग्निशमन और सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं, इन सभी पहलुओं पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।




















































