राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता के गिरते स्तर के बीच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने पर्यावरण मानकों की अनदेखी करने वाले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। नोएडा के सेक्टर-115 में निर्माणाधीन ‘आईवरी काउंटी’ (एम्बाइंसी प्राइवेट लिमिटेड) प्रोजेक्ट की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन सामने आया है। इस घोर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए प्रदूषण विभाग ने विकासकर्ता पर 50 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा (जुर्माना) लगाने की सिफारिश की है। जांच दल को निर्माण स्थल पर धूल रोकने के तमाम दावों की पोल खुलती मिली।
सेक्टर-116 में खराब वायु गुणवत्ता के बाद शुरू हुआ सघन जांच अभियान
नोएडा सेक्टर-116 स्थित निरंतर परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएम स्टेशन) के आसपास बीते चार दिनों से लगातार एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा था। हवा में अचानक घुले इस जहर की असल वजह तलाशने के लिए यूपीपीसीबी के नोएडा क्षेत्रीय कार्यालय ने 5 अक्टूबर 2026 को आसपास के इलाकों में गहन पड़ताल शुरू की। इसी क्रम में मॉनिटरिंग स्टेशन से महज 750 मीटर की दूरी पर सेक्टर-115 स्थित प्लॉट संख्या जीएच-01 पर जारी ‘आईवरी काउंटी’ आवासीय परियोजना में टीम औचक निरीक्षण करने पहुंची, जहां निर्माण गतिविधियां धड़ल्ले से जारी थीं।
मौके पर ग्रीन नेट नदारद, उड़ती धूल और खुले में पड़े थे मलबे के ढेर
निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट के प्रतिनिधि के तौर पर डीजीएम विनोद कुमार सहानी मौके पर मौजूद थे। जांच अधिकारियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कई गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक कमियों का उल्लेख किया गया है। परियोजना स्थल के चारों तरफ धूल के कणों को फैलने से रोकने वाली अनिवार्य विंडब्रेकिंग दीवारें मानकों के अनुसार नहीं बनाई गई थीं। इसके अलावा, बहुमंजिला ढांचे को ढकने के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक ग्रीन नेट भी गायब मिला। इतना ही नहीं, परिसर में खुले आसमान के नीचे स्प्रे गन के जरिए पेंटिंग का कार्य हो रहा था, जिससे केमिकल युक्त कण हवा में तैर रहे थे।
स्थल पर निर्माण सामग्री, खुदी हुई मिट्टी और कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट को पूरी तरह खुले में लावारिस छोड़ दिया गया था। हवा के तेज झोंकों के साथ यह सामग्री धूल बनकर वातावरण में घुल रही थी, लेकिन इन्हें ढकने या नियमित जल छिड़काव का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं दिखा। निर्माण स्थल के भीतरी रास्तों पर धूल की मोटी परतें जमी थीं, जो वाहनों की आवाजाही के दौरान भारी धुंध का रूप ले रही थीं।
बंद मिलीं एंटी-स्मॉग गन, गेट से टायर वॉशिंग मैकेनिज्म भी गायब
वायु प्रदूषण से निपटने के सबसे बुनियादी उपकरणों को लेकर भी भारी लापरवाही सामने आई। परिसर में दो एंटी-स्मॉग गन तो लगाई गई थीं, लेकिन जांच टीम के पहुंचने पर दोनों ही मशीनें बंद और अक्रियाशील पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, इन मशीनों की स्थापना भी निर्धारित तकनीकी मापदंडों के विपरीत की गई थी। निर्माण स्थल से बाहर निकलने वाले डंपर और भारी वाहनों के पहियों को धोने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार पर टायर वॉशिंग सिस्टम तक स्थापित नहीं किया गया था, जिसके चलते गाड़ियों के टायरों में चिपकी मिट्टी मुख्य सड़कों तक पहुंचकर वायु प्रदूषण को और विकराल बना रही थी।
सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों की खुली अवहेलना
निरीक्षण रिपोर्ट में कड़े शब्दों में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना प्रबंधन द्वारा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उच्चतम न्यायालय तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा जारी प्रदूषण नियंत्रण दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। जांच टीम ने इस बात पर जोर दिया है कि सेक्टर-116 के निगरानी स्टेशन पर एक्यूआई के स्तर में हो रही घातक वृद्धि के लिए आईवरी काउंटी में व्याप्त यह लापरवाही एक बहुत बड़ा जिम्मेदार कारक है।
लखनऊ मुख्यालय समेत जिलाधिकारी और प्राधिकरण को भेजी गई रिपोर्ट
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी ऋतेश कुमार तिवारी ने विस्तृत निरीक्षण आख्या उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ के मुख्य पर्यावरण अधिकारी (वृत्त-1) को आवश्यक विधिक कार्रवाई और 50 लाख रुपये के जुर्माने की संस्तुति के साथ प्रेषित कर दी है। इसके अलावा, मामले की गंभीरता को देखते हुए इस रिपोर्ट की प्रतियां गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी और नोएडा विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक/नोडल पर्यावरण अधिकारी को भी भेज दी गई हैं, ताकि परियोजना पर अन्य प्रशासनिक पाबंदियां भी लगाई जा सकें।




















































