समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर के पूर्व विधायक आजम खान का कानूनी संकट कम होने के बजाय और गहराता जा रहा है। दो पैन कार्ड रखने के बहुचर्चित मामले में एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उनकी 7 साल की सजा को बढ़ाकर 10 साल कर दिया है। अदालत ने न सिर्फ पिता-पुत्र की सजा की अवधि और जुर्माने में भारी इजाफा किया है, बल्कि उनके सियासी और निजी भविष्य पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
- सजा में बड़ा इजाफा: एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम खान की सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी है।
- जुर्माना 10 गुना बढ़ा: आजम खान पर जुर्माने की रकम 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है।
- बेटे पर भी सख्ती: अब्दुल्ला आजम की 7 साल की सजा बरकरार है, लेकिन उन पर करीब 3.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- निचली अदालत का फैसला: इससे पहले 17 नवंबर 2025 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।
- शिकायतकर्ता का बयान: भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने कोर्ट के इस कदम को ‘ऐतिहासिक और अनोखा’ फैसला बताया है।
रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला
समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता आजम खान के लिए कानूनी मोर्चे पर राहत की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। शनिवार को रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने दो पैन कार्ड से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में अपना अहम फैसला सुनाया। अदालत ने निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) द्वारा दी गई सजा को नाकाफी मानते हुए आजम खान की 7 साल की जेल की सजा को 10 साल में तब्दील कर दिया है। यह फैसला उन अपीलों पर सुनवाई के दौरान आया, जो दोषियों द्वारा निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं।
अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में न्यायपालिका अब किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
जुर्माने की राशि में भी भारी बढ़ोतरी
सजा की अवधि बढ़ाने के साथ-साथ एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आर्थिक दंड में भी बड़ा बदलाव किया है। अभियोजन पक्ष की वकील सीमा राणा ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि आजम खान पर अब 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन पर महज 50 हजार रुपये का जुर्माना तय किया था।
वहीं, उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान की 7 साल की सजा को कोर्ट ने बरकरार रखा है, लेकिन उन पर भी सख्ती दिखाते हुए जुर्माने की राशि बढ़ाकर लगभग 3.50 लाख रुपये कर दी गई है। यह आर्थिक और कानूनी मार इस राजनीतिक परिवार के लिए एक बहुत बड़ा झटका मानी जा रही है।
क्या है दो पैन कार्ड का यह पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की जड़ें वर्ष 2019 से जुड़ी हैं। रामपुर शहर से मौजूदा भाजपा विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने आजम खान और उनके बेटे के खिलाफ सिविल लाइन कोतवाली में यह मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने गलत हलफनामे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो अलग-अलग पैन कार्ड बनवाए थे और इस साजिश में उनके पिता आजम खान ने भी उनका साथ दिया था।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 17 नवंबर 2025 को निचली अदालत ने दोनों नेताओं को इस मामले में दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
कानूनी दांवपेच और अपील का खारिज होना
निचली अदालत के फैसले से बचने के लिए आजम खान की ओर से 19 नवंबर 2025 को सेशन कोर्ट में अपील दायर की गई थी। बचाव पक्ष को उम्मीद थी कि ऊपरी अदालत से उन्हें कुछ राहत मिलेगी। लेकिन, मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने 20 अप्रैल 2026 को न सिर्फ उनकी अपील खारिज कर दी, बल्कि अभियोजन पक्ष की उस दलील को भी स्वीकार कर लिया जिसमें सजा बढ़ाने की मांग की गई थी। अंततः शनिवार को अदालत ने सजा को 10 साल तक बढ़ा दिया।
भाजपा विधायक ने बताया ‘ऐतिहासिक फैसला’
इस केस के मूल शिकायतकर्ता और रामपुर के भाजपा विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने अदालत के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “दो पैन कार्ड के मामले में यह एक ऐतिहासिक और अपने आप में अनोखा फैसला है। भारत के न्यायिक इतिहास में ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि जब दोषी सजा कम करवाने की अपील करे, और अदालत अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा को ही बढ़ा दे।”
रामपुर की राजनीति में दशकों तक एकछत्र राज करने वाले आजम खान के लिए यह फैसला उनके राजनीतिक करियर के ताबूत में एक और कील साबित हो सकता है। लगातार बढ़ते मुकदमों, उम्र के इस पड़ाव पर 10 साल की लंबी कैद और बढ़ते आर्थिक जुर्माने ने उनके परिवार को चारो तरफ से घेर लिया है। यह मामला सिर्फ एक फर्जीवाड़े का नहीं है, बल्कि इस बात का भी स्पष्ट संकेत है कि कानून की नजर में सत्ता और रसूख की कोई अहमियत नहीं होती। अब देखना यह होगा कि इस भारी-भरकम फैसले के खिलाफ आजम खान की लीगल टीम हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाती है या उन्हें इसी सख्त सजा के साथ आगे का समय जेल की सलाखों के पीछे गुजारना पड़ेगा।


















































