लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के करोड़ों श्रमिकों, नौजवानों और शोषित वर्ग के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रमिक सिर्फ फैक्ट्रियों के पहिए नहीं घुमाते, बल्कि वे उत्तर प्रदेश की प्रगति के असली सारथी हैं। इसी सोच के साथ प्रदेश में बाल श्रम के समूल नाश और रोजगार को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए एक महा-योजना का खाका तैयार किया गया है।मिशन 75: वर्ष 2020 में 20 जिलों से शुरू हुई ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ का दायरा अब उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बढ़ा दिया गया है, ताकि कोई भी बच्चा मजबूरी में कलम छोड़ मजदूरी न करे।लेबर अड्डों की बदलेगी सूरत: बड़े शहरों के श्रमिक एकत्रीकरण स्थलों (लेबर अड्डों) को अब आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां उन्हें सुरक्षित आवास और सहायता मिलेगी।ग्लोबल जॉब मार्केट पर नजर: उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के जरिए युवाओं को जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य जैसे देशों में नौकरी मिलेगी; इसके लिए जापानी और जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं सिखाई जाएंगी।डिजिटल होगी सेवामित्र व्यवस्था: घरेलू और व्यावसायिक सेवाएं देने वाले ‘सेवामित्र ऐप’ को एआई (AI) आधारित डिजिटल जॉब मैचिंग और ऑनलाइन काउंसलिंग से जोड़कर और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।बाल श्रम पर योगी सरकार का अंतिम प्रहार, अब 75 जिलों में लागू होगी विद्या योजनाउत्तर प्रदेश में अब कोई भी बच्चा आर्थिक तंगी या पारिवारिक मजबूरी के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रम एवं सेवायोजन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिया है कि वर्ष 2020 में शुरू की गई ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ को अब राज्य के सभी 75 जिलों में पूर्ण रूप से विस्तारित किया जाए। वर्तमान में यह योजना महज 20 जनपदों में चल रही थी, जिसके तहत 8 से 18 वर्ष के कामकाजी बच्चों को रेस्क्यू कर स्कूलों में दाखिला दिलाया जाता है और उन्हें वित्तीय सहायता दी जाती है।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में बाल श्रम की शिकायतें अधिक हैं, वहां विशेष रेस्क्यू और जागरूकता अभियान चलाए जाएं। इन बच्चों को सिर्फ स्कूलों से ही नहीं जोड़ा जाएगा, बल्कि निजी क्षेत्र (Private Sector) के सहयोग से उनके लिए विशेष कौशल विकास (Skill Development) की कार्ययोजना भी बनाई जाएगी ताकि उनका पुनर्वास स्थायी हो सके।हाईटेक होंगे शहरों के ‘लेबर अड्डे’, श्रमिकों को मिलेगा सम्मानजनक जीवनअक्सर देखा जाता है कि रोजगार की तलाश में ग्रामीण इलाकों से बड़े शहरों की तरफ आने वाले निर्माण श्रमिक चौराहों और खुले आसमान के नीचे रातें गुजारते हैं। योगी सरकार ने इस स्थिति को बदलने का फैसला किया है। सीएम योगी ने निर्देश दिए हैं कि सभी प्रमुख औद्योगिक और बड़े शहरों में स्थित पारंपरिक ‘लेबर अड्डों’ को आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्रों के रूप में तब्दील किया जाए।ये केंद्र महज श्रमिकों के इकट्ठा होने की जगह नहीं होंगे, बल्कि यहां उन्हें कानूनी सहायता, सरकारी योजनाओं की जानकारी, पीने का साफ पानी, शौचालय और सबसे महत्वपूर्ण—सुरक्षित और व्यवस्थित अस्थाई आवास की सुविधा मिलेगी। सरकार का मानना है कि श्रम शक्ति को सुरक्षित माहौल देना राज्य की पहली प्राथमिकता है।कानपुर में बनेगा देश का आधुनिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और हॉस्टलउत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर में कौशल विकास को एक नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी परियोजना को हरी झंडी दी है। कानपुर के विष्णुपुरी में स्थित सरकारी भूमि पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला एक अत्याधुनिक औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI स्तर का) प्रस्तावित किया गया है। इस संस्थान में स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुसार युवाओं को कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लंबर, पेंटर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन जैसे आधुनिक ट्रेड्स में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की ट्रेनिंग दी जाएगी।इसके साथ ही, दूर-दराज से आने वाले छात्रों के लिए कानपुर के ही बेनाझाबर इलाके में 200 बेड की क्षमता वाला एक सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल भी बनाया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को रहने और पढ़ने में कोई असुविधा न हो।विष्णुपुरी (कानपुर) ──> 200 क्षमता वाला आधुनिक प्रशिक्षण संस्थान (कारपेंटरी, फिटर, प्लंबर आदि)
बेनाझाबर (कानपुर) ──> 200 क्षमता वाला आधुनिक छात्र हॉस्टल
ग्लोबल जॉब मार्केट में मचेगी यूपी के युवाओं की धूम, जर्मनी-जापान से हुए करारयोगी सरकार अब उत्तर प्रदेश के युवाओं को सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंचों पर भी स्थापित करने जा रही है। जुलाई 2025 में गठित ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ को अब भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से आधिकारिक भर्ती एजेंसी (Recruiting Agency) का लाइसेंस मिल चुका है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब यूपी के युवाओं को विदेशों में नौकरी दिलाने के लिए किसी धोखाधड़ी करने वाले एजेंट की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सरकार खुद उन्हें विदेश भेजेगी।हाल ही में लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में हुए मेगा रोजगार मेलों में 27,555 युवाओं का चयन हुआ, जिनमें से 2,300 युवाओं को विदेशों में नौकरी के ऑफर लेटर मिले हैं। सरकार ने जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य जैसी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार की बड़ी संभावनाएं चिन्हित की हैं। इन देशों की मांग के अनुरूप युवाओं को जापानी, जर्मन और एडवांस इंग्लिश भाषाओं का प्रशिक्षण देने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) साइन किए गए हैं।डिजिटल रेवोल्यूशन: ‘सेवामित्र व्यवस्था’ और ‘रोजगार संगम’ में जुड़ेगा AI का तड़कातकनीक के माध्यम से भ्रष्टाचार को खत्म करने और पारदर्शिता लाने के लिए ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को सरकारी विभागों में भी अनिवार्य रूप से लागू करने का प्रस्ताव है। वर्ष 2021 से चल रही इस व्यवस्था के तहत नागरिक घर बैठे ऐप, वेब पोर्टल या कॉल सेंटर से प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन या डोमेस्टिक हेल्पर जैसी सेवाएं ले सकते हैं। वर्तमान में इस पोर्टल पर 1,097 सेवा प्रदाता, 5,049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार रजिस्टर्ड हैं।




















































