लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) के जूलॉजी विभाग में एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने परीक्षा पास कराने और ‘पेपर लीक’ का लालच देकर बीएससी (BSc) थर्ड ईयर की एक छात्रा के यौन शोषण का प्रयास किया है। एक वायरल ऑडियो ने शिक्षा के मंदिर में चल रहे इस खौफनाक खेल की पोल खोल दी, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी शिक्षक को सस्पेंड कर दिया है और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मुख्य आरोपी: जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह।
गंभीर आरोप: बीएससी थर्ड ईयर की छात्रा को परीक्षा का पेपर देने के बहाने यौन शोषण की कोशिश।
बड़ी कार्रवाई: विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तत्काल प्रभाव से सस्पेंड, हुसैनगंज पुलिस ने किया गिरफ्तार।
कमेटी की रिपोर्ट: तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने प्रथम दृष्टया 4 गंभीर आरोपों में दोषी पाया।
अल्टीमेटम: 15 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नौकरी से बर्खास्तगी तय।
लखनऊ। शिक्षा के जिन संस्थानों में छात्र-छात्राएं अपना भविष्य संवारने और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने आते हैं, वहां जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) में ठीक ऐसा ही एक डरावना सच सामने आया है।
जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह पर अपनी ही एक छात्रा (BSc 3rd Year) का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगा है। यह पूरा विवाद तब सार्वजनिक हुआ जब आरोपी प्रोफेसर और पीड़ित छात्रा के बीच हुई फोन पर बातचीत का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस ऑडियो में साफ तौर पर सुना जा सकता है कि कैसे रसूख और पद का फायदा उठाते हुए शिक्षक ने छात्रा को परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का प्रलोभन दिया और इसके एवज में अनैतिक मांगें रखीं।
कमेटी के सामने कबूला गुनाह, 4 गंभीर आरोपों में घिरे प्रोफेसर
ऑडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एलयू की कार्यपरिषद ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और 3 सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासन समिति का गठन किया।
इस समिति की अंतरिम जांच रिपोर्ट ने प्रोफेसर की करतूतों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. परमजीत सिंह को प्रथम दृष्टया 4 प्रमुख और गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया है:
पेपर लीक का लालच देकर छात्रा के यौन शोषण का प्रयास करना।
विश्वविद्यालय की शिक्षक आचरण नियमावली (Code of Conduct) का घोर उल्लंघन।
छात्रा को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करना।
परीक्षा से जुड़ी अति-गोपनीय जानकारी को बाहरी व्यक्ति (छात्रा) के साथ साझा करना।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच के दौरान आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के सामने आरोपी प्रोफेसर ने खुद इस बात को स्वीकार कर लिया कि उसने परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं साझा की थीं।
एबीवीपी का जोरदार प्रदर्शन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
जैसे ही यह मामला और ऑडियो कैंपस में मौजूद अन्य छात्रों तक पहुंचा, विश्वविद्यालय का माहौल पूरी तरह से गरमा गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कैंपस में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर था और वे आरोपी की तत्काल बर्खास्तगी की मांग पर अड़ गए।
हालात बेकाबू होते देख विश्वविद्यालय प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद एलयू के परीक्षा नियंत्रक ने सख्त कदम उठाते हुए हुसैनगंज पुलिस स्टेशन में पेपर लीक और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई। पुलिस ने भी बिना कोई देरी किए आरोपी शिक्षक को कैंपस से ही हिरासत में ले लिया और अगले दिन कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
विशाखा गाइडलाइंस का उल्लंघन, अब 15 दिन में तय होगा भविष्य
इस पूरे प्रकरण ने लखनऊ विश्वविद्यालय की साख, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा और अकादमिक निष्ठा को गहरी चोट पहुंचाई है। प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि आरोपी प्रोफेसर का कृत्य न केवल अनैतिक है, बल्कि यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2015 के सख्त विनियमों और महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली ‘विशाखा गाइडलाइंस’ (Vishakha Guidelines) का भी खुला उल्लंघन है।
प्रशासन ने डॉ. परमजीत सिंह को आरोप पत्र (Charge Sheet) थमा दिया है और उन्हें अपना लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए मात्र 15 दिनों का समय दिया गया है। विश्वविद्यालय ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस निर्धारित समय-सीमा के भीतर आरोपी की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक जवाब नहीं आता है, तो उनकी सेवा स्थायी रूप से समाप्त कर दी जाएगी यानी उन्हें सीधे बर्खास्त कर दिया जाएगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय का यह पेपरलीक और यौन उत्पीड़न कांड अकादमिक जगत के लिए एक बड़ा अलार्म है। एक तरफ जहां छात्र संगठन और आम लोग आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी कड़ा रुख अपनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि महिला सुरक्षा और परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि 15 दिन बाद प्रशासन क्या अंतिम फैसला लेता है और पुलिस की जांच में और क्या नए खुलासे होते हैं। यह घटना उन सभी अभिभावकों और छात्रों के लिए चिंता का विषय है जो उच्च शिक्षा संस्थानों पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं।





















































