लखनऊ। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बदलते हालातों के बीच देश में ईंधन बचाने की मुहिम तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस खास अपील का असर अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में भी साफ दिखने लगा है, जहां सूबे के कद्दावर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना अपनी वीआईपी सरकारी गाड़ी छोड़कर कभी साइकिल तो कभी मोटरसाइकिल से सफर करते नजर आ रहे हैं।
पीएम की अपील पर अमल: जब बाइक से निकले सूबे के वित्त मंत्री
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर उस समय राहगीर हैरान रह गए, जब उन्होंने सूबे के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना को किसी चमचमाती सरकारी गाड़ी के बजाय एक आम बाइक पर सफर करते देखा। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की अपील के बाद, वित्त मंत्री ने इसे अपने निजी जीवन में पूरी तरह उतार लिया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) से विशेष बातचीत करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, “इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो परिस्थितियां बनी हैं, उन्हें देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि हम तेल पर अपनी निर्भरता को कम करें। एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के नाते समाज में संदेश देना हमारा कर्तव्य है।”
‘पिछले हफ्ते साइकिल, आज मोटरसाइकिल… गाड़ी को कह दिया है ना’
अपनी सादगी और कड़े अनुशासन के लिए जाने जाने वाले सुरेश खन्ना ने मीडिया से बात करते हुए आगे कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से समय-समय पर की गई अपीलों का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं। पिछले हफ्ते हमने अपनी यात्रा के लिए साइकिल का इस्तेमाल किया था और आज हम मोटरसाइकिल से विधानसभा आए हैं। आज पूरे दिन हम अपनी सरकारी या निजी चार पहिया गाड़ी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करेंगे।”
उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता से भी भावुक अपील करते हुए कहा कि देश के विकास और पर्यावरण को बचाने के लिए हर नागरिक को अपनी क्षमता के अनुसार ईंधन की बचत करनी चाहिए।
“पूरी दुनिया भाग रही है सनातन की ओर” : विधायक नंद किशोर गुर्जर
एक तरफ जहां वित्त मंत्री की इस सादगी की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों का दौर भी गर्म है। भाजपा के फायरब्रांड विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इस बदलाव और देश के मौजूदा माहौल पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “आज प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में पूरा विश्व भारत की सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहा है। विदेशों में लोग सनातनी परंपराओं को अपना रहे हैं और ‘राधे-राधे’ व ‘हर-हर महादेव’ का जाप कर रहे हैं।”
गुर्जर ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में जिस तरह से हिंदुत्व और सांस्कृतिक गौरव की पताका लहराई है, उसी का परिणाम है कि वर्षों से उपेक्षित पड़े इलाहाबाद का नाम बदलकर ‘प्रयागराज’ और फैजाबाद का नाम ‘अयोध्या’ कर उसे उसका प्राचीन गौरव वापस लौटाया गया है।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक तंज
चुनावी समीकरणों और विपक्ष की भूमिका पर बोलते हुए नंद किशोर गुर्जर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया, “हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र पर काम करती है। लेकिन विपक्ष केवल तुष्टिकरण की राजनीति में व्यस्त है। बंगाल में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखने के बाद अब अखिलेश यादव घुटनों के बल आ गए हैं, आज उन्हें भी हनुमान चालीसा पढ़ते हुए देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में सपा की करारी हार पूरी तरह तय है।”
वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, “राहुल गांधी जब भी देश की सीमा से बाहर विदेशी धरती पर जाते हैं, तो वे भारत के खिलाफ बोलना शुरू कर देते हैं। वे हमेशा ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के विचारों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। पीएम मोदी को लेकर उन्होंने जो भी अमर्यादित टिप्पणियां की हैं, देश की जनता उसका जवाब देगी और आने वाले समय में उनका राजनीतिक सूपड़ा साफ होना तय है।”
वंदे मातरम और तुष्टिकरण की राजनीति पर कड़ा रुख
राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बोलते हुए भाजपा विधायक ने कांग्रेस की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मुस्लिम तुष्टिकरण के चक्कर में कांग्रेस हमेशा राष्ट्रभावना से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करती है। अगर हम अपने ही देश में राष्ट्रगान और हमारे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का सम्मान नहीं करेंगे, तो फिर राष्ट्रवाद का कोई अर्थ नहीं रह जाता।” इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालातों का जिक्र करते हुए कहा, “वहां गुंडातत्वों और अराजकता की कमर तोड़ने के लिए मैं मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को बधाई देता हूं।”
उत्तर प्रदेश के इस पूरे घटनाक्रम से एक तरफ जहां शासन-प्रशासन में बैठे शीर्ष नेताओं द्वारा सादगी और पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी तरफ सूबे की सियासी तपिश भी साफ तौर पर महसूस की जा सकती है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का यह कदम न केवल जनता को ईंधन बचाने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब नेतृत्व खुद जमीन पर उतरकर मिसाल पेश करता है, तो उसका असर दूर तक जाता है।





















































