इस्लामबाद
पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा जल रहा है। पहले से आर्थिक बदहाली झेल रहे पाकिस्तान में जहां एक तरफ बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा करने का दावा कर दिया है, वहीं खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने पाक सैनिकों की नाक में दम कर दिया है। इधर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) का आंदोलन जारी है। इस चौतरफा संकट के बीच इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य हेडक्वॉर्टर तक एक ही चर्चा गर्म है- क्या सैन्य प्रमुख जनरल असीम मुनीर देश में तख्तापलट करने वाले हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्ताज के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की लाचार सरकार को हटाकर आसिम मुनीर खुद 'चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर' बनने का मन बना रहे हैं, ताकि देश को पूर्ण रूप से गृहयुद्ध में जाने से बचाया जा सके। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के मुख्यालय में इसे लेकर एक मीटिंग भी हुई है।
बलूचिस्तान में दहली पाकिस्तानी सेना
बलूचिस्तान प्रांत में BLA ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा पूरी तरह खोल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक BLA के रेड में सैंकड़ों पाकिस्तानी सैनिक और पुलिसकर्मी मारे जा चुके हैं। BLA ड्रोन तकनीक और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सैन्य ठिकानों और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के प्रोजेक्ट्स को निशाना बना रही है। कई इलाकों में बलूच विद्रोहियों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि पाकिस्तानी सेना बैकफुट पर आ चुकी है और स्थानीय आबादी का भी सेना से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
PoK में बगावत
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दशकों से दमन झेल रही जनता का गुस्सा अब फूट पड़ा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन ने शहबाज सरकार की नाक में दम कर रखा है। रावलकोट समेत PoK के प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारी खुलेआम कह रहे हैं कि वे पाकिस्तान का हिस्सा नहीं हैं। पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से तंग आ चुकी जनता अब सीधे इस्लामाबाद की गद्दी को चुनौती दे रही है।
खैबर पख्तूनख्वा में TTP का बढ़ता दबदबा
इधर अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पाक को गहरा जख्म दे रहा है। TTP लगातार पुलिस थानों, सैन्य काफिलों और चौकियों को निशाना बना रहा है। पाकिस्तान और अफगान तालिबान सरकार के बीच भी सीमा पर भारी तनाव बना हुआ है।
तख्तापलट करेंगे आसिम मुनीर?
पाकिस्तान में जब-जब सरकार लाचार हुई है, तब-तब सेना ने तख्तापलट किया है। अब आसिम मुनीर भी अय्यूब खान, जिया-उल-हक या परवेज मुशर्रफ की राह अपनाते नजर आ सकते हैं। फिलहाल अलग-अलग मोर्चों पर संकट से निपटने में शहबाज शरीफ सरकार पूरी तरह से नाकामयाब साबित हुई है। BLA और TTP के हमलों में रोज दर्जनों फौजी मारे जा रहे हैं। सेना की छवि भी दांव पर है। ऐसे में मुनीर की स्क्रिप्ट रेडी है। पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी आदिल रजा ने हाल ही में इसे लेकर एक बड़ा दावा भी किया है। उनके मुताबिक 7 घंटे तक चली ISI की एक मीटिंग में इस बात पर सहमति बनी है कि देश का मौजूदा सिस्टम अब गिर चुका है और एक नए सिस्टम पर काम जारी है।
कैसे सत्ता पर कब्जा कर सकते हैं मुनीर?
विशेषज्ञों के मुताबिक आसिम मुनीर तख्तापलट को दो चरणों में अंजाम दे सकते हैं। आसिम मुनीर पहले शहबाज सरकार से देश में नेशनल इमरजेंसी या सेना को सीधे विशेषाधिकार देने का ऐलान करवा सकते हैं। इससे संसद का वजूद सिर्फ नाममात्र का रह जाएगा। इसके बाद अगर BLA और PoK का प्रदर्शन इस्लामाबाद तक पहुंचता है, तो मुनीर देश को टूटने से बचाने का बहाना बनाकर शहबाज शरीफ को बर्खास्त कर देंगे, संविधान को निलंबित करेंगे और सीधे मार्शल लॉ लागू कर खुद राष्ट्रपति बन सकते हैं।
भारत के लिए खतरा?
इतिहास गवाह है कि जब भी पाकिस्तान में कोई सैन्य तानाशाह तख्तापलट कर गद्दी पर बैठता है, तो वह सबसे पहले कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए भारत विरोधी कार्ड खेलता है। अगर आसिम मुनीर तख्तापलट करते हैं, तो अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए वो भारत-पाक सीमा पर युद्ध जैसा माहौल बनाने की नापाक कोशिश कर सकते हैं। हालांकि भारत ऐसी किसी भी स्थिति में मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।





















































