लखनऊ। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के खास मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को एक बड़ा तोहफा देने का संकेत दिया है। राजभवन के जनभवन में आयोजित एक विशेष राज्यस्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश में हस्तशिल्प विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में तेजी से प्रयास जारी हैं। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और हस्तशिल्प कला को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के साथ-साथ बुनकर परिवारों व उनके बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा, उन्नत कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नवीन अवसर उपलब्ध कराना है।
13 जिलों के उत्कृष्ट उत्पादों की लगी प्रदर्शनी
समारोह के दौरान राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से प्रदेश के 13 प्रमुख जिलों के उत्कृष्ट हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की एक भव्य प्रदर्शनी आयोजित की गई। राज्यपाल ने बागपत, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, बाराबंकी, आजमगढ़, कानपुर, लखनऊ, फर्रुखाबाद, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, हापुड़ और उन्नाव से आए कारीगरों के स्टॉलों का गहराई से अवलोकन किया। उन्होंने हस्तनिर्मित कपड़ों और कलाकृतियों की बारीकी व गुणवत्ता की जमकर सराहना की। राज्यपाल ने स्वयं बुनकरों से संवाद कर उनके उत्पादों के निर्माण, बिक्री और बाजार में आने वाली चुनौतियों की विस्तृत जानकारी ली।
17 शिल्पकारों को मिल चुकी है डी.लिट. की मानद उपाधि
पारंपरिक कारीगरों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने बताया कि ‘क्राफ्ट्स रूट्स’ जैसी सामाजिक संस्थाएं इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्थानीय कला को सम्मान देने के लिए प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में अब तक 17 प्रतिभावान हस्तशिल्पियों को ‘डी.लिट.’ की मानद उपाधि से नवाजा जा चुका है। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल स्थानीय शिल्प को नई प्रतिष्ठा मिली है, बल्कि कारीगरों का मान-सम्मान भी बढ़ा है। उन्होंने कारीगरों को आगामी फरवरी माह में राजभवन के जनभवन में आयोजित होने वाली वार्षिक पुष्प प्रदर्शनी में भी अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का न्योता दिया।
‘ग्रीन आर्मी’ की 2,500 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को रेखांकित करते हुए आनंदीबेन पटेल ने पूर्वांचल की ‘ग्रीन आर्मी’ की उपलब्धि को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत लगभग 2,500 महिलाएं बेकार और पुराने वस्त्रों को रिसाइकिल कर सुंदर बैग और रोजमर्रा के उपयोगी सामान तैयार कर रही हैं। इन महिलाओं को सिलाई मशीनें प्रदान कर स्वावलंबी बनाया गया है, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद ‘क्राफ्ट्स रूट्स’ की संस्थापिका अनारबेन पटेल ने जानकारी दी कि उनकी संस्था देश भर में 75 हजार से अधिक महिलाओं को कौशल विकास और विपणन से जोड़ चुकी है, और अब विदेशी छात्र भी भारतीय पारंपरिक कला का अध्ययन करने के लिए यहां इंटर्नशिप करने आ रहे हैं।





















































