उत्तर प्रदेश में मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले नकली और अवैध दवा माफियाओं के खिलाफ योगी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। ताजनगरी आगरा के दवा बाजार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने एक साथ १३ बड़ी दवा फर्मों पर छापेमारी कर हड़कंप मचा दिया। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई में विभाग ने ३.६३ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संदिग्ध, मिलावटी और सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित दवाओं का जखीरा बरामद किया है। इस मामले में संलिप्त मुख्य आरोपियों के खिलाफ तीन नई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया भी सरगर्मी से शुरू कर दी गई है।
कमिश्नर के नेतृत्व में महाअभियान: दो प्रतिष्ठान पूरी तरह सील
अवैध दवा सिंडिकेट की कमर तोड़ने के लिए यह व्यापक अभियान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के सीधे दिशा-निर्देशन में चलाया गया। आगरा के प्रमुख थोक दवा बाजारों को घेरकर १५ अनुभवी ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ १३ संदिग्ध ठिकानों पर धावा बोला। गहन पड़ताल के बाद गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर दो बड़े दवा प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह सील कर दिया गया। इसके अलावा, कई अन्य दुकानों पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (Drugs and Cosmetics Act) के कड़े प्रावधानों के तहत दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। विभाग ने लैब टेस्टिंग के लिए ३५ संदिग्ध दवाओं के सैंपल एकत्र कर जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा: सरकारी सप्लाई की दवाओं की री-लेबलिंग
एफएसडीए द्वारा की गई इस प्रारंभिक जांच में देश के विभिन्न राज्यों तक फैले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का चौंकाने वाला पर्दाफाश हुआ है। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क न केवल नकली दवाओं के निर्माण और आपूर्ति में लिप्त था, बल्कि विभिन्न सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए जारी की जाने वाली ‘नॉट फॉर सेल’ (बिक्री के लिए नहीं) दवाओं की अवैध रूप से री-लेबलिंग कर उन्हें खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहा था। छापेमारी के दौरान फर्जी बिलिंग और बिना किसी वैध लाइसेंस या दस्तावेजों के दवाओं की खरीद-फरोख्त से जुड़े पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। संदिग्ध फर्मों द्वारा दिखाए गए बिल पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं, क्योंकि जिन कंपनियों के नाम पर बिल जारी थे, उन्होंने ऐसी किसी भी खेप की आपूर्ति करने से साफ तौर पर इंकार कर दिया है।
ड्रग माफियाओं पर कसता शिकंजा: ५८ थोक लाइसेंस पहले ही रद्द
इस व्यापक जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी दवा व्यापारियों और संबंधित फर्मों के संचालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज कराने के लिए स्थानीय थाने में तहरीर दे दी गई है। इस नई कार्रवाई के बाद चालू अभियान में दर्ज मुकदमों की कुल संख्या अब बढ़कर ९ हो जाएगी। विभाग की मुस्तैदी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मई २०२६ से जारी इस विशेष शुद्धता अभियान के तहत अब तक कुल ५८ थोक दवा विक्रेताओं के लाइसेंस या तो पूरी तरह निरस्त किए जा चुके हैं या उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
अवैध वसूली करने वालों पर भी होगी जबरन वसूली की कार्रवाई
आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की यह कार्रवाई महज दवाओं की जब्ती तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे सक्रिय आर्थिक और आपराधिक गठजोड़ को जड़ से उखाड़ फेंकना है। उन्होंने सभी जोन के अधिकारियों को नकली दवाओं की आमद, अवैध री-लेबलिंग, और डॉक्टरों को मिलने वाले फ्री ‘फिजिशियन सैंपलों’ की ब्लैक मार्केटिंग पर पैनी नजर रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने दवा व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अभियान की आड़ में विभाग के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अवैध धन उगाही की शिकायत सही पाई गई, तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ जबरन वसूली (Extortion) का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।





















































