उत्तर प्रदेश की सियासी सरगर्मी एक बार फिर चरम पर है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अवधेश प्रसाद ने राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों और जनसमस्याओं को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्यशैली पर बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आम जनता से जुड़े बुनियादी और वास्तविक संकटों का समाधान करने के बजाय केवल मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति में मसरूफ है। उन्होंने मेरठ की वीभत्स घटना, जिला पंचायतों में हो रही नियुक्तियों और सूबे के अन्नदाताओं के सामने खड़े संकट का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों को पूरी तरह विफल करार दिया है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर तंज और जिला पंचायतों का विवाद
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने जिला पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति के हालिया फैसले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। शनिवार को कार्यकाल पूरा करने वाले जिला पंचायत अध्यक्षों को ही दोबारा प्रशासक पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की चुनावी प्राथमिकताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जो हुकूमत बड़े स्तर पर ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का दम भरती है, वह समय सीमा के भीतर जिला पंचायतों के लोकतांत्रिक चुनाव तक संपन्न कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक स्थानीय स्तर के निकाय चुनाव वक्त पर नहीं कराए जाते, तब तक देशव्यापी एक साथ चुनाव की बात करना केवल एक काल्पनिक दिवास्वप्न और खोखला दावा बनकर रह जाएगा।
मेरठ कांड पर चिंता: महिलाओं और दलितों पर बढ़े अत्याचार
मेरठ में एक दलित छात्रा के साथ हुई दर्दनाक हत्या की घटना पर गहरा दुख प्रकट करते हुए अवधेश प्रसाद ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के रुख का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश की शीर्ष अदालत ने भी इस संवेदनशील प्रकरण पर किसी भी तरह की ओछी राजनीति न करने की हिदायत दी है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कुछ नेताओं के बयानों की आलोचना की। सपा सांसद ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान शासनकाल में उत्तर प्रदेश के भीतर महिलाओं और शोषित वर्ग के खिलाफ अपराध की तमाम सीमाएं लांघ दी गई हैं। उन्होंने कहा कि जब शासन-प्रशासन का इकबाल और प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाता है, तो अपराधी बेलगाम हो जाते हैं और ऐसी दिल दहला देने वाली वारदातें आम हो जाती हैं।
किसानों को नहीं मिल रही खाद, पेपर लीक से युवा परेशान
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य का मुद्दा उठाते हुए सांसद ने कहा कि इस समय उत्तर प्रदेश का किसान बेहद लाचार और आक्रोशित है। धान की बुवाई और फसल चक्र के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर जब खाद की सबसे ज्यादा दरकार होती है, तब पूरे प्रदेश में यूरिया और डीएपी की भारी किल्लत बनी हुई है। लाइनों में लगने के बावजूद किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके भीतर सरकार के प्रति भारी नाराजगी है। इसके साथ ही उन्होंने रोजगार के मोर्चे पर युवाओं के साथ हो रहे धोखे का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लगातार लीक हो रहे हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में है। यहां तक कि अयोध्या की एक महत्वपूर्ण जांच समिति से जुड़ी गोपनीय रिपोर्ट भी सार्वजनिक रूप से लीक हो गई, लेकिन मुख्यमंत्री इन गंभीर प्रशासनिक चूकों को सुधारने के बजाय महज अपनी राजनीतिक छवि को चमकाने में व्यस्त हैं।
ध्रुवीकरण की राजनीति और संवैधानिक अधिकारों की दुहाई
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सरकार के रुख की आलोचना करते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि जब भी भाजपा सरकार विकास, सुरक्षा और रोजगार के मोर्चे पर घिरती है, वह जानबूझकर नमाज, मदरसा अनुदान और मुस्लिम समाज से जुड़े विवादित विषयों को चर्चा में ले आती है ताकि वास्तविक समस्याओं पर पर्दा डाला जा सके। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए भारतीय संविधान की महत्ता को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र ने हर नागरिक को अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने और सत्ता से सीधे सवाल पूछने का अधिकार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनसमस्याओं से मुंह चुराना किसी भी चुनी हुई सरकार के लिए सही रास्ता नहीं है और विपक्ष जनता के हितों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगा।





















































