उत्तर प्रदेश में आगामी कांवड़ यात्रा को सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलने वाली इस पावन और विशाल यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के बेहद कड़े और आधुनिक इंतजाम किए जा रहे हैं। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार शिवभक्तों की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बनाया जा रहा है, जिसमें आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ एक विशेष सुरक्षा इकाई की भी तैनाती की जाएगी। चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है।
चप्पे-चप्पे पर आधुनिक तीसरी आंख का पहरा, पल-पल की मिलेगी रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार ने मीडिया को तैयारियों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी। जिले से गुजरने वाले दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ-साथ पवित्र गंगा नहर मार्ग के तमाम शहरी और ग्रामीण इलाकों में आधुनिक तकनीकी क्षमता से लैस सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे। ये कैमरे पूरी तरह से संवेदनशील और आधुनिक तकनीक पर आधारित होंगे, जो किसी भी अप्रिय या संदिग्ध गतिविधि को भांपते ही कंट्रोल रूम को तुरंत यानी रियल-टाइम अलर्ट भेजेंगे। इससे पुलिस बल को बिना समय गंवाए तत्काल रिस्पॉन्स करने और त्वरित कार्रवाई करने में बड़ी मदद मिलेगी।
2500 कैमरों और ड्रोन से होगी हवाई निगरानी, थानों में बनेगा कोऑर्डिनेशन सेंटर
सुरक्षा के विशाल नेटवर्क का ब्योरा देते हुए एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पूरे जिले के कांवड़ मार्गों पर लगभग 2500 सीसीटीवी कैमरे सक्रिय किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, ऊंचे और दुर्गम स्थानों पर कड़ी नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों के जरिए हवाई निगरानी भी की जाएगी। यात्रा के दौरान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए एक अनूठा मास्टर प्लान बनाया गया है। कांवड़ रूट पर स्थित सभी पुलिस थानों में पुलिस महकमे के साथ-साथ स्वास्थ्य, विद्युत और नगर निकाय/सफाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चौबीसों घंटे एक साथ मौजूद रहेंगे, ताकि किसी भी आकस्मिक परिस्थिति या आपातकाल में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की खैर नहीं, अतिरिक्त पुलिस बल की मांग
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में सुरक्षा के मोर्चे पर पुलिस बेहद सतर्क है। पुलिस कप्तान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि भड़काऊ या भ्रामक खबरें फैलाने वाले तत्वों पर डिजिटल स्पेस में भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर नजर रखने के लिए एक विशेष टीम काम करेगी, जो किसी भी अफवाह वाले संदेश को वायरल होने से पहले ही ब्लॉक करेगी और ऐसा करने वाले उपद्रवियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। इसके अतिरिक्त, कांवड़ियों की भारी संख्या को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल और रिजर्व पुलिस लाइंस से अतिरिक्त फोर्स की मांग भी की गई है।
कांवड़ सेवा शिविरों के लिए सख्त गाइडलाइंस, पहचान पत्र हुआ अनिवार्य
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगने वाले सेवा शिविरों (कैंपों) को लेकर भी प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। एसएसपी के मुताबिक, कांवड़ मार्ग पर लगने वाले सभी पंडालों और शिविरों में सीसीटीवी कैमरे लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। विशेष रूप से जहां भोजन तैयार किया जा रहा है यानी किचन एरिया पर कैमरों की सीधी नजर रहेगी ताकि भोजन की शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, शिविरों में सेवा देने वाले सभी सेवादारों, रसोइयों और कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा और उनके लिए वैध पहचान पत्र (आईडी कार्ड) हर समय पास में रखना बेहद जरूरी होगा।
बारिश के मद्देनजर जलभराव से मुक्ति, 55 किमी मार्ग पर दूधिया रोशनी की व्यवस्था
चूंकि यात्रा का समय सावन के महीने में है, इसलिए मानसून की बारिश को देखते हुए भी मुजफ्फरनगर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। जिलाधिकारी और जिला पंचायत प्रशासन ने कांवड़ मार्गों पर होने वाले संभावित जलभराव को रोकने के लिए पुख्ता ड्रेनेज व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत के प्रशासक डॉ. वीरपाल निर्वाल ने इस संबंध में बताया कि 55 किलोमीटर लंबे गंगा नहर मार्ग पर रोशनी और स्वच्छता का विशेष जिम्मा जिला पंचायत उठा रही है। रात के समय शिवभक्तों को चलने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए इस पूरे 55 किलोमीटर के दायरे में जिला पंचायत अपने निजी जनरेटरों के माध्यम से अस्थायी लाइटिंग और दूधिया रोशनी की मुकम्मल व्यवस्था करेगी।
आस्था का महापर्व: हरिद्वार से पवित्र जल लाते हैं शिवभक्त
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के महीने में आयोजित होने वाली यह कांवड़ यात्रा करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। इस यात्रा में भगवान भोलेनाथ के भक्त (कांवड़िए) अत्यंत कठिन पैदल यात्रा करते हुए उत्तराखंड के पावन तीर्थ हरिद्वार पहुंचते हैं। वहां मां गंगा में डुबकी लगाकर पवित्र गंगाजल को कांवड़ में भरते हैं और फिर वापस अपने गंतव्य की ओर लौटते हैं। इसी पवित्र जल से सावन की शिवरात्रि के पावन अवसर पर विभिन्न शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है, जिसके चलते इस पूरे मार्ग पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।





















































