लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजभर ने सपा के पूर्ववर्ती शासनकाल को “गुंडागर्दी, अराजकता और जातीय हिंसा” का एक भयावह दौर करार देते हुए तीखा हमला बोला है। लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत और सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने आधिकारिक बयानों में मंत्री राजभर ने बुलंदशहर और बदायूं के बहुचर्चित मामलों का हवाला देकर तत्कालीन सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने एलान किया है कि सपा सरकार के दौरान अति-पिछड़ों और दलितों पर हुई प्रताड़ना व जातीय हिंसा की एक-एक घटना की सूची बनाकर वे अब जनता की अदालत में बेनकाब करेंगे।
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने हालिया कुछ राजनीतिक घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि विपक्षी खेमे के लोगों में वही पुराना रवैया फिर से दिखने लगा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के शासन में जिस तरह अपराधियों और उपद्रवियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, वह दौर उत्तर प्रदेश की जनता भूली नहीं है।
बुलंदशहर हाईवे की दर्दनाक घटना और आजम खान के बयान का जिक्र
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अपने तीखे हमले में साल 2016 की उस दिल दहला देने वाली घटना को याद किया, जो दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे पर बुलंदशहर के पास घटित हुई थी। उन्होंने बताया कि किस तरह एक बेबस मां और उसकी महज 14 वर्षीय नाबालिग बेटी को दरिंदों ने अपनी हैवानियत का शिकार बनाया था। राजभर के अनुसार, पीड़ित मां अपराधियों के सामने अपनी बच्ची की सुरक्षा की भीख मांगती रही और गिड़गिड़ाती रही, परंतु अपराधियों पर उसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस वीभत्स कांड की याद आते ही आज भी समाज की अंतरात्मा कांप उठती है।
सपा नेतृत्व को घेरते हुए राजभर ने आगे कहा:
“रामपुर वाले आपके सबसे खास नेता आजम खान ने इस अमानवीय कृत्य पर जो बेहद अशोभनीय और असंवेदनशील टिप्पणी की थी, उसे उत्तर प्रदेश का कोई भी नागरिक भूल नहीं सकता। अपराधियों को शह देने की इस मानसिकता के कारण ही उस दौर में अपराधियों के हौसले बुलंद थे।”
उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि साल 2020 में इस वारदात के मुख्य आरोपी को कानून के शिकंजे में लाने के लिए जब पुलिस ने प्रयास किया, तो उसने पुलिस टीम पर ही हमला करने का दुस्साहस किया। राजभर ने कड़े शब्दों में कहा कि यह कोई पूर्ववर्ती ढीली ढाली व्यवस्था नहीं थी जहां खाकी अपराधियों के सामने घुटने टेक दे; बल्कि वर्तमान सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस दुर्दांत अपराधी को मुठभेड़ में ढेर कर दिया।
बदायूं कांड का हवाला और ‘आर्टिकल 15’ फिल्म पर गंभीर आरोप
अपने सिलसिलेवार हमलों को आगे बढ़ाते हुए कैबिनेट मंत्री ने मई 2014 के बदायूं जिले की एक और दर्दनाक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकाल में दो दलित बहनों के साथ बर्बरता करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई और उनके शवों को पेड़ से लटका दिया गया था। राजभर ने आरोप लगाया कि उस समय सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर अपराधियों को बचाने के प्रयास किए गए, क्योंकि बहुसंख्यक आरोपी तत्कालीन सत्ताशीर्ष के स्वजातीय समूह से ताल्लुक रखते थे।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि:
- बदायूं की इस संवेदनशील घटना के वास्तविक तथ्यों को दबाने का प्रयास किया गया।
- अभिनव सिन्हा निर्देशित फिल्म ‘आर्टिकल 15’ के माध्यम से इस पूरे मामले को सामान्य (नॉर्मलाइज) दिखाने की कोशिश हुई।
- फिल्म के भीतर आरोपियों की वास्तविक जातियों को बदलकर पेश किया गया ताकि सच पर पर्दा डाला जा सके।
राजभर ने दोटूक शब्दों में कहा कि सिनेमाई पर्दे पर बदलाव करने से धरातल की कड़वी सच्चाई और इतिहास को बदला नहीं जा सकता है, जिसे सूबे के शोषित और वंचित समाज ने स्वयं झेला है।
‘एक जनपद-एक जातीय हिंसा’: दलितों और पिछड़ों के उत्पीड़न पर राजभर की चेतावनी
विपक्ष पर अपना प्रहार और तेज करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने तंज कसा कि तत्कालीन सरकार के एजेंडे में विकास की जगह ‘एक जनपद-एक जातीय हिंसा’ की अघोषित नीति शामिल थी, जिसे कथित तौर पर एक विशेष वर्ग द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा था। उन्होंने कहा कि उस दौर में दलितों, शोषितों और अति-पिछड़े समाज के लोगों के साथ मारपीट, हत्या, जमीनों पर कब्जे और महिलाओं के साथ अनाचार की अनगिनत घटनाएं हुईं, जिन्हें अब दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने अखिलेश यादव को सीधे तौर पर सचेत करते हुए कहा कि अब वह समय आ चुका है जब उन सभी अत्याचारों का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाएगा। राजभर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के पिछड़े और दलित समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने ऊपर हुए उस ऐतिहासिक अन्याय को अच्छी तरह याद रखे हुए है और वर्तमान सजग राजनीतिक माहौल में वे किसी भी कीमत पर उस पुराने दौर की वापसी नहीं होने देंगे।





















































