लखनऊ। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता को मंगलकामनाएं प्रेषित करते हुए मातृशक्ति के समग्र उत्थान का मजबूत संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित उत्तर प्रदेश के स्वप्न को धरातल पर उतारने के लिए महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री के अनुसार, देवी उपासना का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों, न्याय और नारी शक्ति के वास्तविक सशक्तीकरण का माध्यम है।
आदिशक्ति की आराधना और धर्म की पुनर्स्थापना का महापर्व
मुख्यमंत्री ने ‘योगी की पाती’ के माध्यम से पौराणिक आख्यानों का उल्लेख करते हुए बताया कि जब तीनों लोकों पर महिषासुर का भीषण अत्याचार बढ़ गया था, तब समस्त देवगणों के तेज और सामूहिक ऊर्जा से आदिशक्ति का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा ने दुराचारी महिषासुर का संहार कर समस्त सृष्टि में धर्म और न्याय का पुनर्गठन किया। लंका विजय के प्रसंग का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने भी रावण से युद्ध से पूर्व मां जगतजननी की कठिन उपासना की थी। जब 108 नीलकमलों में से एक कमल घट गया, तो प्रभु श्रीराम ने संकोच त्यागकर अपना नयन ही मां के चरणों में अर्पित करने का निर्णय लिया। उनकी इस अटूट निष्ठा से प्रसन्न होकर देवी ने प्रकट होकर उन्हें विजय का वरदान दिया।
सज्जनता के साथ शक्ति और संकल्प का अटूट सामर्थ्य
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मां भगवती एक ओर जहां वात्सल्य और ममता का स्वरूप हैं, वहीं धर्म की रक्षा और दुष्टों के दलन के लिए चंडी बनकर मधु-कैटभ, शुंभ-निशुंभ एवं रक्तबीज जैसे महादानवों का संहार भी करती हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि मां के नौ स्वरूप वास्तव में अहंकार, लोभ, आसक्ति और नकारात्मक प्रवृत्तियों पर धैर्य, नम्रता, न्याय, साहस और दृढ़ संकल्प की विजय का प्रतीक हैं। समाज को संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सज्जन होना पर्याप्त नहीं है; सज्जनता समाज में तभी प्रभावी परिणाम देती है जब उसकी पीठ पर शक्ति और संकल्प का अटूट सामर्थ्य खड़ा हो। यह सामर्थ्य ही आज हमारी मातृशक्ति को हर प्रकार के भय से मुक्त करने और आत्मनिर्भर बनाने का आधार स्तंभ है।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और युवाओं की बढ़ती भागीदारी
उत्तर प्रदेश को सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मां विंध्यवासिनी, मां पाटेश्वरी और मां शाकम्भरी जैसे पावन शक्तिपीठों पर नवरात्र में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और विशेषकर युवाओं का उत्साह इस बात का साक्ष्य है कि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से मजबूती से जुड़ रही है। राज्य सरकार इसी चेतना को आगे बढ़ाते हुए बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुदृढ़ सुरक्षा और प्रगति के समान अवसर उपलब्ध करा रही है ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल बन सके।
जमीनी स्तर पर असरदार साबित हुआ ‘मिशन शक्ति’
प्रदेश में नारी सशक्तीकरण के प्रयासों का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2020 में शारदीय नवरात्र के अवसर पर ही ‘मिशन शक्ति’ अभियान की नींव रखी गई थी, जिसका मुख्य ध्येय नारी सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान को जनआंदोलन बनाना था। वर्तमान में इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस बल में आज 44,000 से अधिक महिला पुलिसकर्मी मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रही हैं, और पुलिस भर्तियों में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त, ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई कोरी और रानी अवंतीबाई लोधी जैसी ऐतिहासिक वीरांगनाओं के अदम्य साहस को नमन करते हुए प्रदेश में तीन महिला पीएसी बटालियनों की स्थापना की गई है।
आर्थिक स्वावलंबन और कल्याणकारी नीतियों का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा और उनके विकास को निरंतर संबल दिया जा रहा है। वहीं, आर्थिक मोर्चे पर भी ग्रामीण और शहरी महिलाओं ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के जरिए एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं संगठित होकर स्वावलंबन और वित्तीय स्वतंत्रता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
व्रत और पूजन के साथ सेवा का भी लें संकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि नवरात्र के पावन दिनों में देवी पूजन और उपवास के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक को एक सामाजिक संकल्प भी लेना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि हर व्यक्ति किसी बहन की हिफाजत के लिए आवाज बने, किसी जरूरतमंद बालिका की पढ़ाई में मददगार साबित हो और किसी महिला को आत्मनिर्भर बनाने में संबल प्रदान करे। उन्होंने दोहराया कि आदिशक्ति की सच्ची पूजा तभी साकार होगी जब राज्य की प्रत्येक नारी भयमुक्त, सम्मानित और आत्मनिर्भर जीवन जिएगी, और यही संकल्प ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के लक्ष्य को सिद्ध करेगा।




















































