उत्तर प्रदेश की सियासत में अयोध्या को लेकर एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। बलरामपुर के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधे तौर पर ललकारते हुए अयोध्या से चुनावी अखाड़े में उतरने का खुला निमंत्रण दे दिया। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि विपक्ष में दम है तो वह अयोध्या से अपना नामांकन दाखिल करे, मुकाबला आमने-सामने का होना चाहिए। इस दौरान सीएम ने 2017 से पहले के दौर को याद दिलाते हुए सपा शासनकाल में पनपे माफिया राज, तस्करी और उपेक्षा पर भी जोरदार प्रहार किया।
‘अयोध्या से आप भी पर्चा भरिए, मैं भी भरता हूं’: सियासी रण का खुला न्योता
बलरामपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के उन बयानों का करारा जवाब दिया, जिसमें उनके अयोध्या से चुनाव लड़ने पर तंज कसे जाते रहे हैं। सीएम योगी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अयोध्या केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं का पावन धाम है। वे वहां सत्ता की लालसा से नहीं, बल्कि उस पावन नगरी के समग्र विकास को गति देने और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के संकल्प के साथ जाते हैं।
सपा प्रमुख को सीधी चुनौती पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पीछे से बयानबाजी करने या सहयोगियों को आगे करने के बजाय सीधा मुकाबला होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं प्रस्ताव देता हूं कि अखिलेश यादव भी अयोध्या से नामांकन दाखिल करें और मैं भी करता हूं। जनता के बीच चलकर अपनी-अपनी किस्मत आजमा लेते हैं। राजनीति में मुकाबला हमेशा बराबरी और सामने का होना चाहिए, चेलों की आड़ में सियासत करने का कोई औचित्य नहीं है।”
त्रेतायुग की अयोध्या बनाम सपा काल का अंधकार
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान अयोध्या की दुर्दशा का कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में रामनगरी को बुनियादी सुविधाओं तक से वंचित रखा गया था। उस दौर में शहर में मात्र चंद घंटे बिजली आती थी और हर तरफ गंदगी के अंबार नजर आते थे।
सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि आज की अयोध्या आधुनिक बुनियादी ढांचे और स्वच्छता के वैश्विक मानकों को छू रही है। चौड़ी सड़कें, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और विश्वस्तरीय सुविधाएं आज अयोध्या को त्रेतायुग के वैभव और रामराज्य की संकल्पना से जोड़ती हैं, जिसे देखकर विकास विरोधियों को असहजता महसूस हो रही है।
बलरामपुर को मिली 803 करोड़ रुपये की 78 विकास परियोजनाओं की सौगात
चुनावी वार-पलटवार के बीच मुख्यमंत्री ने बलरामपुर जिले को समग्र विकास से आच्छादित करने के लिए 803 करोड़ रुपये से अधिक की 78 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि कभी उपेक्षा और पिछड़ेपन का दंश झेलने वाला यह आकांक्षी जिला अब असीम संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, एक वोट की ताकत ने इस पूरे सीमावर्ती क्षेत्र का भाग्य और स्वरूप बदल दिया है। जिस वोट का इस्तेमाल पहले पहचान के संकट, अराजकता और सीमा पार तस्करी को बढ़ावा देने के लिए किया जाता था, उसी जनमत ने आज कानून के राज और अभूतपूर्व आधारभूत संरचना की मजबूत नींव रखी है।
‘माफिया राज और अवैध कब्जों का दौर हुआ समाप्त’
साल 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में प्रदेश पूरी तरह अराजकता और गुंडाराज की गिरफ्त में था। जिस जमीन पर भू-माफिया नजर गड़ा देते थे, उस पर जबरन कब्जा हो जाता था। व्यापारियों को रंगदारी के लिए फोन पर धमकियां दी जाती थीं और उद्योग-धंधे चौपट हो चुके थे। जर्जर सड़कें और प्रशासनिक निष्क्रियता बलरामपुर की पहचान बन चुकी थी।
सीएम योगी ने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत माफिया नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। प्रदेश में सुरक्षा, सुशासन और निवेश का ऐसा माहौल तैयार किया गया है, जहां अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंच रहा है।




















































