उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के अंतर्गत आने वाले दनकौर थाना क्षेत्र में एक निजी शिक्षण संस्थान की जमीन पर अवैध कब्जे के प्रयास का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने तब तूल पकड़ लिया जब बुधवार को विवादित भूमि पर अचानक निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। स्कूल प्रबंधन द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और बड़ी संख्या में आक्रोशित छात्र मौके पर पहुंच गए। छात्रों ने विरोध जताते हुए निर्माणाधीन बाउंड्रीवॉल को पूरी तरह से तोड़ डाला। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और भारी पुलिस बल तैनात कर मौके पर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
क्या है पूरा भूमि विवाद और कैसे गरमाया मामला
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, दनकौर क्षेत्र के नवादा गांव के रहने वाले दो व्यक्तियों द्वारा स्थानीय स्तर पर कुछ जमीन खरीदी गई थी। बुधवार 7 अगस्त को खरीदारों की तरफ से उसी भूमि पर निर्माण कार्य की शुरुआत कराई गई थी। जब इस बात की भनक बिहारी लाल एंग्लो संस्कृत हाई स्कूल एसोसिएशन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और प्रबंधक को लगी, तो उन्होंने तुरंत इस पर कड़ी आपत्ति जताई। प्रबंधन का स्पष्ट कहना था कि उक्त जमीन को लेकर स्वामित्व का विवाद चल रहा है और इस संबंध में दादरी के उपजिलाधिकारी की अदालत में वाद पहले से ही विचाराधीन है। इसके बाद मामले की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस और पीआरवी को दी गई।
पुलिस की त्वरित दखल और राजस्व विभाग को सूचना
सूचना मिलते ही पुलिस दल ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। पुलिस ने फिलहाल विवादित स्थल पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया है और दोनों पक्षों को मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। स्कूल परिसर के बिल्कुल पास यह विवाद होने के कारण वहां सैकड़ों छात्र एकत्रित हो गए थे, जिन्हें पुलिस ने समझा-बुझाकर सुरक्षित वापस स्कूल भेज दिया। इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के लिए राजस्व विभाग को भी आधिकारिक तौर पर अवगत करा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वर्तमान में क्षेत्र में पूरी तरह से शांति व्यवस्था कायम है।
78 साल पुराना इतिहास और स्कूल प्रबंधन के बड़े दावे
इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्कूल के प्रबंधक मनोज गोयल ने जिला मजिस्ट्रेट को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपकर जमीन पर कॉलेज का मालिकाना हक होने का पुख्ता दावा किया है। प्रबंधन के अनुसार, बिहारी लाल एंग्लो संस्कृत हाई स्कूल एसोसिएशन इंटर कॉलेज की मुख्य इमारत गाटा संख्या 1702, 1703, 1704 और 1705 पर स्थित है। स्कूल भवन का निर्माण लगभग 78 वर्ष पहले यानी वर्ष 1948 से भी पहले कराया गया था और उसी वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार से इसे औपचारिक मान्यता प्राप्त हुई थी, तब से यहां नियमित रूप से छात्र-छात्राओं की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इसके अलावा कॉलेज से जुड़ी कृषि विद्यालय की भूमि गाटा संख्या 364 (रकबा 12-19-0) आधिकारिक खतौनी में कृषि विद्यालय के नाम पर दर्ज है।
पुराने न्यायालयीन आदेश और लगातार मिल रही धमकियां
प्रबंधन ने दलील दी है कि वर्ष 1992 में चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में वाद संख्या 1154 (बिहारी लाल एंग्लो संस्कृत हाई स्कूल एसोसिएशन बनाम ग्राम सभा दनकौर) के तहत उनके पक्ष में आदेश पारित किया गया था। उनके पास सभी वैध भूलेख और दस्तावेज मौजूद हैं। इसके अलावा कॉलेज परिसर के भीतर करीब 74 दुकानें भी बनी हुई हैं, जिनकी देखरेख स्कूल एसोसिएशन द्वारा की जाती है। प्रबंधन ने गंभीर आरोप लगाया कि 19 सितंबर 2026 की रात को भी कुछ लोगों ने कृषि विद्यालय की बाउंड्री तोड़कर कब्जा करने की कोशिश की थी, जिसकी शिकायत पुलिस से की गई थी। इसके बाद 22 सितंबर को कुछ दबंग लोग स्कूल पहुंचे और प्रधानाचार्य महकार सिंह को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी कि वे दोबारा निर्माण करेंगे। अब 7 अगस्त को फिर से निर्माण शुरू होने पर यह विवाद खुलकर सामने आ गया है। स्कूल प्रबंधन ने जिला प्रशासन से क्षतिग्रस्त दीवार को पुलिस सुरक्षा में दोबारा बनवाने और अवैध कब्जे का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।





















































