उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में झोलाछाप अस्पतालों और स्वास्थ्य माफियाओं के काले कारोबार का एक बेहद खौफनाक और अमानवीय मामला सामने आया है। यहां एक अवैध रूप से संचालित निजी स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव (डिलीवरी) के दौरान एक नवजात शिशु की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद गहरी नींद से जागे स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस बल के साथ मिलकर त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए इस फर्जी अस्पताल को पूरी तरह से सील कर दिया है। प्राथमिक जांच में जो सच सामने आया है, वह सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है—यह पूरा अस्पताल बिना किसी योग्य डॉक्टर, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ और वैध लाइसेंस के धड़ल्ले से चल रहा था।
कैसे हुआ मामले का खुलासा और क्या है पूरा घटनाक्रम?
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित पिता शुभम पांचाल ने स्वास्थ्य विभाग में इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता शुभम के अनुसार, उन्होंने 12 जून को अपनी नौ महीने की गर्भवती पत्नी को बेहट रोड स्थित ‘सिंघल हेल्थ केयर’ नामक इस सेंटर में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया था। अस्पताल प्रबंधन ने एक ऑपरेशन (सर्जरी) को अंजाम दिया, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने नवजात बच्चे को मृत घोषित कर दिया। पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि इस कथित अस्पताल में न तो कोई योग्य और डिग्रीधारी चिकित्सक मौजूद था और न ही उनके पास मरीजों का इलाज करने का कोई कानूनी अधिकार था।
सीएमओ के सख्त निर्देश, पुलिस बल के साथ हुई छापेमारी
इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. प्रवीण कुमार ने तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके आदेश पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) डॉ. कुणाल जैन ने भारी पुलिस फोर्स के साथ बेहट रोड स्थित ‘सिंघल हेल्थ केयर’ पर दबिश दी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर मुआयना करने के बाद तत्काल प्रभाव से अस्पताल के मुख्य द्वारों पर ताला जड़ते हुए उसे सील कर दिया।
न डॉक्टर, न डिग्री… जांच में सामने आईं चौंकाने वाली कमियां
कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो गया कि यह केंद्र पूरी तरह से अवैध था। सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि जब अस्पताल संचालक से वैध पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) दस्तावेज मांगे गए, तो वे कुछ भी पेश करने में पूरी तरह विफल रहे। इससे पहले भी विभाग द्वारा इस केंद्र को नोटिस जारी किया गया था, जिसका कोई जवाब प्रबंधन की ओर से नहीं दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस वक्त गर्भवती महिला का ऑपरेशन कर प्रसव कराया जा रहा था, उस दौरान मौके पर कोई भी प्रशिक्षित डॉक्टर या योग्य चिकित्सा कर्मचारी मौजूद ही नहीं था। यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ का मामला है।
दस्तावेज पेश नहीं किए तो दर्ज होगी एफआईआर, उपकरण जब्त
कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके से कई महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों को भी जब्त कर लिया है, जिनका इस्तेमाल अवैध रूप से इलाज और ऑपरेशन के लिए किया जा रहा था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि इस सुविधा केंद्र को पूरी तरह सील कर दिया गया है। यदि अस्पताल का संचालक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आवश्यक कानूनी दस्तावेज और पंजीकरण प्रमाण पत्र विभाग के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।





















































