उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में एक युगांतकारी पहल का आगाज हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल की उपस्थिति में सहकारिता आधारित ‘भारत टैक्सी’ सेवा और ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का औपचारिक लोकार्पण किया। कैब चालकों को निजी कंपनियों के भारी-भरकम कमीशन चक्र से मुक्ति दिलाने के लिए तैयार की गई यह व्यवस्था न केवल चालकों से शून्य कमीशन लेगी, बल्कि उन्हें 5 लाख रुपये का पुख्ता सामाजिक सुरक्षा कवच भी मुहैया कराएगी। इसके साथ ही कृषि उन्नयन के तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक (एलडीबी) के जरिए मिलने वाले दीर्घकालिक कृषि ऋण की ब्याज दरों को 11 फीसदी से सीधे घटाकर 6 फीसदी कर दिया गया है।
चार प्रमुख शहरों से संचालन का आगाज, विभिन्न संस्थानों से रणनीतिक एमओयू
प्राथमिक चरण में भारत टैक्सी का संचालन प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों—लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में शुरू किया गया है। सेवा के विस्तार और निर्बाध संचालन के लिए लखनऊ मेट्रो, लखनऊ पुलिस और लखनऊ एयरपोर्ट समेत विभिन्न प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित किए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान भारत टैक्सी के सीईओ कर्नल हिमांशु और अडानी एयरपोर्ट लखनऊ के प्रतिनिधियों ने एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान किया। योजना के तहत कैब चालकों के अलावा दोपहिया और तिपहिया वाहन चालक भी इस मंच पर पंजीकृत हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से पांच सारथियों को भारत टैक्सी के शेयर प्रमाण पत्र बांटे और हरी झंडी दिखाकर वाहनों के पहले जत्थे को रवाना किया।
चालकों को मिलेगा स्वाभिमान और आर्थिक सुरक्षा
मंच को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि असंगठित क्षेत्र के वाहन चालकों के हितों की रक्षा पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं में उपेक्षित रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत टैक्सी मात्र एक यात्री परिवहन साधन नहीं, बल्कि भारत की गतिशीलता को वास्तविक प्रगति में बदलने का सशक्त माध्यम है। चालक अब बिना किसी कमीशन की कटौती के सीधे कमाई करेंगे और 5 लाख रुपये के सामाजिक सुरक्षा लाभ के चलते निश्चिंत होकर सेवाएं दे सकेंगे। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का संदर्भ देते हुए स्मरण कराया कि किस प्रकार युवाओं ने बाइक के जरिए लाखों श्रद्धालुओं को संगम तक सुगमता से पहुंचाया था। मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि ग्रामीण बस परिवहन तंत्र को भी इसी सहकारी ढांचे के अनुरूप विकसित किया जाए, जिससे लाखों ग्रामीण युवाओं को सीधे रोजगार प्राप्त हो सके।
किसानों को 6% ब्याज पर दीर्घकालिक कर्ज, 5 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य
समारोह में किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि पोर्टल ऐप’, उर्वरक वितरण हेतु समर्पित मोबाइल ऐप और अत्याधुनिक कोऑपरेटिव डाटा सेंटर की डिजिटल शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत एलडीबी के जरिए खेती-किसानी और आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद के लिए मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर में 5 प्रतिशत की सीधी कटौती कर इसे 6 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। योजना के पांच लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति पत्र भी सौंपे गए। आगामी वर्षों में 5 लाख लघु एवं सीमांत कृषकों को इस रियायती वित्तीय व्यवस्था से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सहकारिता आंदोलन का कायाकल्प और कृषि कल्याण के आंकड़े
मुख्यमंत्री ने सहकारिता के ऐतिहासिक महत्व पर बल देते हुए कहा कि कुशल नेतृत्व सहकारिता को समृद्धि का मार्ग बनाता है, जबकि कुप्रबंधन इसे पतन की ओर धकेलता है। केंद्र में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय के गठन के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पूर्व वित्तीय संकट में घिरे 16 जिला सहकारी बैंकों में से 15 बैंक अब पूर्ण रूप से लाभ की स्थिति में आ चुके हैं। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की ब्याज मुक्त कैश क्रेडिट सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया है और आंदोलन से 54 लाख नए सदस्य जुड़े हैं।
कृषि उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में सरकार बनते ही 86 लाख लघु एवं सीमांत किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज माफ किए गए थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 24 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि को सिंचाई तंत्र से जोड़ा गया है। 16 लाख से अधिक निजी नलकूप धारक किसानों को निशुल्क विद्युत और नहरों व सरकारी नलकूपों से मुफ्त जल उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में राज्य की 122 चीनी मिलें सक्रिय हैं, जिनमें 100 से अधिक मिलें खरीद के चौथे दिन ही गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। बीते 9 वर्षों में प्रदेश के गन्ना किसानों को 3.30 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष भुगतान सुनिश्चित किया गया है।





















































