उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में दशकों पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासत गरमा गई है। शनिवार तड़के जिला प्रशासन ने भारी पुलिस छावनी के बीच 6 बुलडोजर तैनात कर मस्जिद को पूरी तरह ढहा दिया। इस प्रशासनिक कार्रवाई का असर सियासी गलियारों में दिखा, जहां विरोध दर्ज कराने सहारनपुर जा रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने उनके आवास पर ही रोक दिया। प्रशासन का दावा है कि जिला अदालत द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद पूरी विधिक प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है, जबकि विपक्षी दलों और मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय जाने से पहले ही आनन-फानन में कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है।
इकरा हसन की पुलिस से तीखी नोकझोंक, बोलीं- ‘दबा नहीं सकते जनता की आवाज’
सहारनपुर कूच करने की तैयारी में जुटीं कैराना सांसद इकरा हसन के आवास पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इस दौरान सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस का वीडियो भी सामने आया। इकरा हसन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक निर्वाचित सांसद को प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर जनता की बात रखने से रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याएं उठाने के लिए चुना जाता है और पुलिसिया पहरे से इस आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
‘दबाव से डरने वाला नहीं परिवार’—पूर्व सांसद तबस्सुम हसन
सांसद आवास पर मौजूद उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने भी प्रशासनिक रवैये पर कड़ा रोष जताया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार किसी भी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से भयभीत होने वाला नहीं है। वे केवल जनता की सेवा और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए राजनीति में हैं। अधिकारियों से शांतिपूर्ण संवाद स्थापित करने जा रही एक जनप्रतिनिधि को नजरबंद जैसी स्थिति में रखना लोकतांत्रिक संस्थाओं और मर्यादाओं पर सीधा आघात है।
छावनी में तब्दील कलेक्ट्रेट परिसर: पीएसी और आरआरएफ की तैनाती
कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट और आसपास के कई किलोमीटर के दायरे को सील कर दिया गया। मौके पर स्थानीय पुलिस के अलावा पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RRF) के जवानों को तैनात किया गया था। कलेक्ट्रेट के दोनों मुख्य फाटकों को बंद कर दिया गया और आम नागरिकों व नमाजियों के प्रवेश पर सख्त पाबंदी लगा दी गई। शुक्रवार देर रात से ही मस्जिद गिराए जाने की चर्चाएं फैलने के बाद मौके पर भारी भीड़ एकत्रित होने लगी थी, जिसे पुलिस बल ने मौके से खदेड़कर शांति व्यवस्था बनाई।
सपा नेताओं का आरोप: हाईकोर्ट जाने का मौका दिए बिना की गई कार्रवाई
सपा एमएलसी शाहनवाज खान और पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने इस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए हैं। शाहनवाज खान ने बताया कि नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद मामले में 30 दिनों का विधिक समय और राहत की बात थी। मस्जिद प्रबंधन जिला अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की पूरी तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही सुबह अंधेरे में ध्वस्तीकरण को अंजाम दे दिया गया। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से उनके आवास पर भेंट की, जहां डीएम ने विधिक परिधि में कार्य करने की बात कही। नेताओं ने शहरवासियों से किसी भी उकसावे में न आने और अमन-चैन बनाए रखने की अपील की है।
डीआईजी का पक्ष: विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद हुई कार्रवाई
सहारनपुर परिक्षेत्र के डीआईजी अभिषेक सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रशासन ने बिना किसी जल्दबाजी के नियमानुसार कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में नोटिस जारी करने, पक्षों की सुनवाई और फिर अपीलीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह कार्रवाई अमल में लाई गई है। जिला अदालत द्वारा अपील खारिज किए जाने के उपरांत अवैध ढांचे को हटाने का अंतिम निर्णय लिया गया, ताकि सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जा सके।
शिकायत से ध्वस्तीकरण तक: ऐसा रहा इस विवाद का घटनाक्रम
इस पूरे प्रकरण की नींव 10 फरवरी 2025 को पड़ी थी, जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर मस्जिद निर्माण का आरोप लगाया था। शिकायत में परिसर में बनी दुकानों और डाकघर से अवैध किराया वसूली का भी दावा किया गया था। प्रशासनिक जांच में जमीन सरकारी पाए जाने के बाद 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट अदालत में वाद दर्ज हुआ।
16 जुलाई 2026 को नगर मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए हटाने का आदेश दिया और 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का जुर्माना लगाते हुए 30 दिनों की मोहलत दी। इस फैसले के खिलाफ मस्जिद पक्ष 20 जुलाई को जिला अदालत पहुंचा। अंततः 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने नगर मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी, जिसके बाद शनिवार को ध्वस्तीकरण की यह बड़ी कार्रवाई हुई।





















































