उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक सरकारी परिसर के भीतर नमाज अदा करने का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद सियासी और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली मार्ग पर स्थित सर्किट हाउस परिसर में धार्मिक गतिविधि करने के आरोप में समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान के विरुद्ध पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। प्रशासनिक संपत्ति पर नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर लोक निर्माण विभाग की तहरीर पर यह कानूनी कदम उठाया गया है। पुलिस महकमे ने केस दर्ज करते हुए पूरे मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।
वायरल वीडियो के बाद हरकत में आया प्रशासनिक अमला
पूरा मामला दिल्ली रोड स्थित वीआईपी सर्किट हाउस से जुड़ा है, जहां हाजी मोहम्मद उस्मान का नमाज पढ़ते हुए एक संक्षिप्त वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल गया। वीडियो संज्ञान में आने के बाद सर्किट हाउस के प्रभारी एवं पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) के अवर अभियंता ने मझौला थाने में लिखित शिकायत दी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह घटना 3 सितंबर 2026 की है, जबकि प्रशासन को इसकी आधिकारिक सूचना 4 सितंबर की देर रात लगभग 10:21 बजे प्राप्त हुई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं 285 और 292 के तहत अपराध पंजीकृत किया है। मामले की विस्तृत विवेचना उपनिरीक्षक सौरभ कुमार को सौंपी गई है।
पार्टी बैठक में शामिल होने पहुंचे थे सपा पदाधिकारी
घटनाक्रम के अनुसार, 3 सितंबर को उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव मुरादाबाद के सर्किट हाउस में ठहरे हुए थे। वहां पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ उनकी एक संगठनात्मक बैठक बुलाई गई थी। इसी बैठक में हिस्सा लेने के लिए बिलारी क्षेत्र के सपा विधायक मोहम्मद फईम के चाचा व पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान भी वहां उपस्थित हुए थे। आरोप है कि बैठक के दौरान उन्होंने परिसर में खड़ी अपनी चार पहिया गाड़ी की ओट में नमाज अदा की। इसी बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने इस दृश्य को अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित हो गया।
विवाद गहराते ही इंटरनेट से हटाया गया वीडियो, जांच जारी
वीडियो के व्यापक प्रसार और विवाद गहराने के बाद इसे संबंधित सोशल मीडिया खातों से हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। मझौला थाना पुलिस अब कई तकनीकी और वैधानिक पहलुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है। विवेचना टीम इस बात की तहकीकात कर रही है कि वीडियो को किसने फिल्माया, इसे इंटरनेट पर किस मंशा से साझा किया गया और सरकारी संपत्ति के नियमों के तहत क्या-क्या उल्लंघन हुआ है।
पहले भी राजनीतिक विवादों से जुड़ा रहा है नाम
हाजी मोहम्मद उस्मान का नाम इससे पहले भी राजनीतिक विवादों में सामने आ चुका है। वर्ष 2024 के आम चुनावों के दौरान बिलारी में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा आयोजित की गई थी। उस दौरान मंच से दिए गए कथित तीखे बयानों को लेकर उनके ऊपर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित कानूनी कार्रवाई की बात भी चर्चा में रही थी। बहरहाल, मौजूदा प्रकरण में पुलिस का पूरा ध्यान सरकारी भवन में बिना अनुमति धार्मिक गतिविधि और वीडियो प्रसारण से जुड़े वैधानिक पहलुओं की पड़ताल पर केंद्रित है।





















































