प्रयागराज और हरिद्वार में गुरुवार को निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रयागराज के ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम में सुबह की पहली किरण के साथ ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटने शुरू हो गए। गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन स्थल पर पवित्र डुबकी लगाकर भक्तों ने अपने परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ से घाट पूरी तरह गुलजार रहे और हर तरफ ‘हर-हर गंगे’ के जयकारे गूंजते रहे। निर्जला एकादशी का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिसे लेकर भक्तों में गजब का उत्साह दिखा।
भीमसेनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
निर्जला एकादशी को ‘भीमसेनी एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष स्थान है, क्योंकि इसे सभी 24 एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। इस कठिन व्रत में श्रद्धालु पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। एक श्रद्धालु ने संगम तट पर अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा, “आज का दिन बहुत पुण्यदायी है। पवित्र त्रिवेणी में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना करने से मन को असीम शांति मिलती है।”
पौराणिक संदर्भ और वर्ष का विशेष संयोग
हरिद्वार स्थित अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस पर्व की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि महाभारत काल में महर्षि वेदव्यास ने पांडु पुत्र भीम को यह व्रत रखने का परामर्श दिया था। महंत ने इस वर्ष की विशिष्टता बताते हुए कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल एक अतिरिक्त माह होने की वजह से वर्ष में 24 के बजाय 26 एकादशियां पड़ रही हैं, जिससे निर्जला एकादशी का महत्व और अधिक बढ़ गया है। महंत रवींद्र पुरी ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि यदि पवित्र नदियों तक पहुंचना संभव न हो, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और भगवान नारायण का ध्यान, पूजा और जप करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल में ही भगवान का वास माना जाता है, इसलिए इस दिन जल का दान और स्नान सर्वोपरि है।
दान-पुण्य का महा-पर्व
निर्जला एकादशी न केवल उपवास का दिन है, बल्कि यह दान की महिमा को भी रेखांकित करती है। भक्तों के बीच फल, जल, हाथ के पंखे और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा रही है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। घाटों पर दान-पुण्य के साथ-साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया, जिससे समूचा वातावरण भक्तिमय हो गया।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
हजारों की तादाद में उमड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। प्रयागराज और हरिद्वार के घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। एएसपी अनुष्का बडोला ने सुरक्षा व्यवस्था पर जानकारी देते हुए बताया कि शाम की गंगा आरती तक सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन हो रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और भक्तों की सुरक्षा के लिए तमाम जरूरी कदम उठाए गए हैं। दिनभर चले धार्मिक आयोजनों और स्नान के बाद शाम को गंगा आरती के साथ इस पुण्य पर्व का समापन हुआ, जिसने सभी भक्तों के मन में एक नई ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।





















































